पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा जांच का सुझाव
प्रस्तावित कमेटियां छात्रों के रहने की जगहों की समय-समय पर सुरक्षा जांच में मदद करेंगी। साथ ही एमसीडी, फायर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इमारत, बिजली और अग्नि सुरक्षा की स्थिति की जांच कराने का काम करेंगी। याचिका में बिना मंजूरी चल रहे या असुरक्षित भवनों की पहचान कर संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए जानकारी देने का भी सुझाव दिया गया है।
छात्रों का सुरक्षित डेटाबेस बनाने की मांग
याचिका में निजी आवासों में रहने वाले छात्रों का स्वैच्छिक डेटाबेस बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इसमें छात्रों की सहमति और डेटा की सुरक्षा का ध्यान रखने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इससे आपात स्थिति में छात्रों तक जल्दी पहुंचने और उन इलाकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। याचिका में कॉलेज स्तर की कमेटी में कॉलेज प्रशासन, छात्र, पुलिस, जिला प्रशासन, एमसीडी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। वहीं, विश्वविद्यालय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एमसीडी, दिल्ली सरकार, पुलिस और छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही गई है। बड़े कोचिंग और छात्र केंद्रों के लिए भी इसी तरह की कमेटियां बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
सुरक्षित और सस्ते हॉस्टल बढ़ाने की मांग
पीआईएल में सरकारी और विश्वविद्यालयों के हॉस्टल की संख्या और क्षमता बढ़ाने की भी मांग की गई है, ताकि छात्रों को सुरक्षित और किफायती आवास मिल सके। याचिका के साथ दायर अंतरिम आवेदन में मामले का अंतिम फैसला आने तक छात्रों की शिकायतों के लिए तुरंत एक नोडल सिस्टम बनाने, संबंधित विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और बड़े छात्र व कोचिंग केंद्रों में निजी आवासों की पहचान कर उनकी सुरक्षा जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में दिल्ली सरकार, एमसीडी, दिल्ली पुलिस, दिल्ली विश्वविद्यालय, जीजीएसआईपी विश्वविद्यालय, पीजीडीएवी कॉलेज, यूजूसी, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, जेएनयू और डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली समेत कई संस्थानों को प्रतिवादी बनाया गया है।