सोलर सिस्टम्स एंड मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा की पहली कक्षा शुरू, आठ देशों के नौ अंतरराष्ट्रीय फेलो हुए शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञ तैयार करने की दिशा में आईआईटी दिल्ली ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान के सोनीपत कैंपस में पहली बार किसी शैक्षणिक कार्यक्रम की शुरुआत हुई है। पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा इन सोलर सिस्टम्स एंड मैनेजमेंट की पहली कक्षा बृहस्पतिवार से शुरू हो गई है। यह एक वर्षीय कार्यक्रम आईआईटी दिल्ली के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग(डीईएसई) द्वारा और फ्रांस के इंस्टीट्यूट नेशनल डी एनर्जी सोलर के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। कार्यक्रम के लिए संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन ने सहयोग दिया है।
इस प्रोग्राम के पहले बैच में आठ देशों के नौ अंतरराष्ट्रीय फेलो शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सौर ऊर्जा तकनीक, उसके अनुप्रयोग और प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी।
डीईएसई के प्रमुख प्रो. रमेश नारायणन ने कहा कि इस पहल के साथ आईआईटी दिल्ली ऊर्जा, शिक्षा और प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य 120 से अधिक सदस्य देशों के लिए ऐसे प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करना है, जो आगे अपने-अपने देशों में सोलर टेक्नोलॉजी एंड एप्लीकेशन रिसोर्स सेंटर्स( स्टार सी) में प्रशिक्षक के रूप में काम कर सकें।
आईआईटी दिल्ली सोनीपत कैंपस के प्रोफेसर-इन-चार्ज प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने कहा कि सोनीपत कैंपस में यह संस्थान का पहला ऐसा कार्यक्रम है, जिसमें भौतिक रूप से कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। आने वाले वर्षों में यहां इस तरह के और कार्यक्रम शुरू करने की योजना है।
कार्यक्रम पूरा करने के बाद फेलो को यूरोप में एक महीने की इंटर्नशिप भी कराई जाएगी, जहां वे सौर ऊर्जा की आधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं को समझेंगे। इसके बाद उन्हें उनके संबंधित देशों के स्टार सी केंद्रों में जिम्मेदारी दी जाएगी।