दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उस जनहित याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर देखें, जिसमें कोविड-19 महामारी को समाप्त करने का दावा करने वाले उत्पादों के परीक्षण ओर प्रमाणन के लिए दिशा निर्देश तैयार करने की मांग की गई है। इस याचिका में एक निजी कंपनी पर उत्पाद बेचकर जनता को गुमारा करने का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति डी.एन. पाटिल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने ग्रीन ड्रिम फाउंडेशन की ओर से दायर की गई। इस याचिका का निपटारा करते हुए केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस याचिका प्रतिनिधि के तौर पर देखें और कानून, नियमों और दिशा निर्देशों के अनुसार निर्णय करें।
इस जनहित याचिका में अदालत से नोवल कोरोनावायरस को मारने और उत्पादों को किटाणुरहित बनाने का दावा करने वाले उत्पादों के टेस्टिंग, लांचिंग और प्रमाणित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता समीर नंदवानी ने अदालत के समक्ष कहा कि लॉग 9 मेटेरियल प्राइवेट लिमिटेड ने दावा किया है कि उसका उत्पाद कोरोना ओवन भोजन को किटाणुरहित बना सकता है। वकील ने कहा कि कंपनी ने यह भी दावा किया है कि यह पीपीई किट को भी किटाणुरहित बना सकता है, जिससे स्वास्थ्यकर्मी कोरोना रोगियों के इलाज के लिए फिर से प्रयोग में ला सकते हैं।
याचिका में दावा किया गया है कि इस उत्पाद को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद बेचा जा रहा है, जिसके पास ऐसे किसी भी उत्पाद के लिए सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार नहीं है।