‘अगर विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को जिंदा रखना है तो लोगों को सहनशील बनना होगा।’ यह टिप्पणी हाईकोर्ट ने हिंदी फिल्म ‘राम की जन्मभूमि’ की रिलीज को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। खुद को मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का वंशज बताने वाले एक व्यक्ति ने यह याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने याकूब हबीबुद्दीन तकी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘चाहे सही है या गलत, लेकिन विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बचाने के लिए लोगों को सहनशील बनना होगा। तकी ने फिल्म के निर्माता और केंद्र को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की है।
यह फिल्म 29 मार्च को रिलीज होनी है। कोर्ट की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि तकी ने याचिका में कहा है कि इस फिल्म में सीधे तौर पर उसे व उसके पूर्वजों को निशाना बनाया गया है। इस फिल्म से देश की एकता व अखंडता को ठेस लगेगी और सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है।
याची के वकील की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि फिल्म के किस हिस्से में उसका व उसके पूर्वजों का अपमान किया गया है या फिल्म के किन दृश्यों से देश में सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है। ऐसा लगता है कि यह याचिका पूरी तरह फिल्म के शीर्षक पर आधारित है। कोर्ट ने तकी को फिल्म के विवादित दृश्यों या सामग्री के साथ संशोधित याचिका दायर करने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार की तारीख तय की है।