मेडिकल पीजी कोर्स के पाठ्यक्रम में होने जा रहे बदलावों को लेकर पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पीटा) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पशु सरंक्षण को लेकर कार्य करने संस्था का कहना है कि डॉक्टर बनने के लिए खरगोशों की बलि क्यों?।
भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एमसीआई) को पत्र लिखते हुए पीटा ने पाठ्यक्रम में बदलाव की कड़ी निंदा की है। इनका कहना है कि नए पाठ्यक्रम को लागू किया जाता है कि अनगिनत खरगोश और अन्य वन्य जीवों को विचलन, घुटन, दौरे, रक्तस्त्राव जैसी गंभीर परेशानियां झेलनी पड़ेंगी।
पीटा की मांग की है कि मौजूदा कानून एवं वन मंत्रालय के नियमों की पालना करते हुए तत्काल नए पाठ्यक्रम से जीव जंतुओं के इस्तेमाल को हटाया जाए। दरअसल एमसीआई ने कुछ ही समय पहले मेडिकल फॉर्मेकॉलोजी और फिजियोलॉजी के संशोधित पाठ्यक्रम में कुत्ता, बिल्ली और जलचर जीवों पर प्रयोग के स्थान पर कंप्यूटर प्रणाली का इस्तेमाल करने की सिफारिश की है।
लेकिन इसी पाठ्यक्रम में खरगोश और चूहों पर पीड़ादायी प्रयोगों की अनुमति दी गई है। जबकि वर्ष 2012 में वन मंत्रालय ने पशु प्रयोगों एवं विच्छेदन पर पूरी तरह से रोक लगाई है।