चौराहों या सड़क किनारे पशुओं को काटने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी गाजीपुर मंडी में अवैध तरीके से पशुओं को काटने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी. हरिशंकर की पीठ ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम से पूछा कि किस नियम के तहत और कहां पर कटान की अनुमति दी जाती है? पीठ ने यह सवाल तब किया जब निगम के वकील ने कहा कि इस तरह की गतिविधि को विनियमित करने के लिए नीति है। इस पर पीठ ने कहा कि सवाल नीति का नहीं है।
आपको यह बताना होगा कि किस नियम-कानून के तहत इस तरह की गतिविधि की कहां पर अनुमति दी जाती है। अन्यथा आपको ऐसी दुकानों को बंद करना होगा। निगम आठ अगस्त की सुनवाई में नियम बताए।
पशुओं के अधिकारों पर काम करने वाली गौरी मौलेखी ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर मंडी में अवैध तरीके से जानवरों को काटा जाता है। उनके वकील राज पंजवानी ने कहा कि पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण कानून तथा खाद्य सुरक्षा कानून के तहत ऐसी गतिविधि को विनियमित करने का प्रावधान है।
हाईकोर्ट ने पिछले साल 31 अगस्त को दिल्ली एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड को निर्देश दिया था कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बगैर गाजीपुर मंडी में चल रही पशु कटान की दुकानों को बंद करे।