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सुनपेड़ में इस बार दिवाली पर न फूटेंगे पटाखे और न जलेंगे दिये

Mon, 26 Oct 2015 07:35 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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पांच दिन पहले गांव सुनपेड़ में हुई आगजनी की घटना में दो मासूमों की मौत का दंश झेलने वाले सुनपेड़ के सैकड़ों ग्रामीण इस साल दिवाली पर न तो पटाखे छोड़ेंगे और न ही मोमबत्तियां जलाकर घरों की सजावट करेंगे।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस हत्याकांड से गांव की बदनामी हुई है। हत्याकांड की कालिख धुलने पर ही किसी त्यौहार को मनाने के बारे में सोचा जाएगा। पिछले साल पांच अक्तूबर 2014 को जब तीन लोगों की हत्या हो गई थी, तो शोक में डूबे गांव सुनपेड़ में दिवाली नहीं मन पाई।

गांव में पिछले एक साल से काफी तनाव था। दलित समाज में जहां भय था, वहीं सवर्ण जाति के लोग के घाव हरे थे कि 20 अक्तूबर को एकबार फिर सुनपेड़ गांव पर दो मासूमों की हत्या की कालिख पुत गई। जिससे पूरा गांव शोकग्रस्त है।
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एक साल में थोड़ा बदला था गांव का माहौल

पिछले साल तीन लोगों की हत्या के एक साल बाद गांव का माहौल थोड़ा बहुत बदला था। लोग आपस में मिलकर रहने लगे थे। लोगों ने एक दूसरे के कार्यक्रमों में पहले की तरह शिरकत करना शुरू कर दिया था।

दलित समाज की 60 वर्षीय सोनदई ने बताया कि गांव को शायद किसी की नजर लग गई है,  यहां तो हमेशा शांति बनी रहती थी। भेदभाव जैसा माहौल नहीं है।

गांव के ही बिशन ठाकुर कहते हैं कि गांव में माहौल शांत था। पिछले दिनों दलित समुदाय के जागरण और आरोपी बलवंत के पोते के जन्मदिन में दोनों समाज के लोगों ने शिरकत की थी।

लेकिन इस हादसे ने पूरे गांव को हिला दिया। दो मासूस बच्चों की जान चली गई और उनकी मां जिंदगी और मौत से जूझ रही है। गांव में एक बार फिर मातम छा गया है। ऐसे में लोग दिवाली मनाने से परहेज करेंगे।
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'नेता केवल राजनैतिक रोटी सेक रहे हैं'

सुनपेड़ मामला दो पक्षों का झगड़ा है न कि जातिगत। अब राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं के पास कोई काम नहीं है। ऐसे में वह सुनपेड़ आकर अपनी राजनीतिक रोटी सेक रहे हैं।

यह कहना है प्रदेश के शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा का। उन्होंने रविवार को तरुण क्रांति अवार्ड वितरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पत्रकारों के सवाल पर यह बातें कही।

उन्होंने कहा कि हुड्डा के राज में प्रदेश में दलितों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हुए। तब किसी राजनेता को दलितों की याद नहीं आई। उन्होंने कहा कि मिर्चपुर और गोहाना कांड हुड्डा सरकार की ही देन है।
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