शहर के लॉजिक्स मॉल से बृहस्पतिवार को सेक्टर-12 के रवींद्र ने 500 रुपये की खरीदी की। काउंटर पर 100-100 के पांच नोट देने के बाद उसे काउंटर पर बैठे शख्स ने कहा कि क्या इसकी पेमेंट मैं अपने कार्ड से कर दूं। जब उससे इसकी वजह पूछी तो उसने बताया कि यह 100-100 के पांच नोट मुझे घर चलाने के लिए चाहिए।
कुछ इस तरह से लोग छोटे नोट जुटाने की जुगत में लगे हुए हैं। शहर में छोटे नोट की कमी से लोग बेहद परेशान हैं। ऐसे में जिनके हाथों में 100-100 के नोट दिखे, उसे भाग्यशाली समझा जा रहा है।
शहर की दुकानों व मॉल्स में ज्यादातर काउंटर पर बैठा क्लर्क या दुकानदार कोशिश में लगा हुआ है कि उसके पास ज्यादा से ज्यादा 100-100 के नोट हों। यही नहीं कुछ लोग व्यक्तिगत खर्चे के लिए भी 100-100 के नोट चाह रहे हैं। मार्केट में 2000 के नोट तो आ गए, लेकिन 500 के नोट की कमी है। 2000 का नोट टूट नहीं पा रहा है। अगर 500 के नोट ज्यादा आ जाएं तो यह समस्या दूर हो सकती है।
रोडवेज ने भी किया छुट्टे का समाधान
यूपी रोडवेज के अधिकारी भी छुट्टे कमी से बेहद परेशान हैं। नोएडा डिपो के एआरएम सतेंद्र वर्मा का कहना है कि रोडवेज को 500 और 1000 का नोट लेने के निर्देश हैं, लेकिन छुट्टे पैसे नहीं होने से उनको परेशानी हो रही है। इसका उपाय लगाते हुए अब परिचालक की ओर से यात्री को 500 और 1000 का नोट लेकर टिकट दिया जाएगा।
टिकट देने के बाद बचे हुए पैसे टिकट पर ही लिखकर परिचालक साइन करके देगा। यही नहीं परिचालक उक्त यात्री का नाम और पता भी लिख लेगा। बाद में वह पैसा रोडवेज के कार्यालय में जमा कर देगा।
इसके बाद यात्री चाहे तो रोडवेज के डिपो में आकर टिकट का पैसा देकर 500 या 1000 के नोट ले सकता है। इससे रोडवेज को राजस्व भी मिल जाएगा और लोग यात्रा भी पूरी कर लेंगे। अगर यात्रा के दौरान ही छुट्टे पैसे मिल जाते हैं तो परिचालक पैसा उसी समय भी दे सकता है।
दादी की रसोई में बांटे 100-100 के नोट
बैंकों और डाकघरों की ओर से लोगों को नोट बदलने के बाद 2000 का नोट थमा दिया जा रहा है, लेकिन इसके छुट्टे नहीं मिलने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। इसका समाधान निकालते हुए दादी की रसोई के संचालक अनूप खन्ना ने शुक्रवार को कुछ जानकारों के माध्यम से 20,000 के 100-100 के नोट जुटाए और उसके छुट्टे बेहद जरूरतमंदों को दिए। उनका कहना है कि कुछ और लोगों से अपने घरों में रखे गैर जरूरी 100-100 के नोट देने की अपील की गई है, ताकि दूसरे जरूरतमंदों को दिए जा सकेें।