गाजीपुर लैंडफिल साइट पर कूड़ा डालने पर लगी पाबंदी का असर रविवार को उत्तर दिल्ली नगर निगम के रानी खेड़ा में देखा गया। पूर्वी दिल्ली नगर निगम का कूड़ा लेकर रानी खेड़ा पहुंचे ट्रकों को स्थानीय निवासियों ने खाली नहीं करने दिया। फैसले के विरोध में लोगों ने कराला-मुंडका व रोहतक मेन रोड पर जाम लगा दिया।
दूसरी तरफ रानी खेड़ा में पंचायत कर लोगों ने शपथ ली कि उनके इलाके में लैंडफिल साइट बनने नहीं दी जाएगी। देर शाम तक भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब दस ट्रक कूड़ा लादे खड़े। पुलिस स्थानीय निवासियों से बातचीत कर मसले को सुलझाने की कोशिश करती रही।
इससे पहले रविवार सुबह पूर्वी दिल्ली इलाके का कूड़ा लेकर ट्रक रानी खेड़ा पहुंचे। वहां डीडीए की तरफ से आवंटित करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर कूड़ा उतारा जा रहा था। तीन ट्रकों का कूड़ा उतारा भी जा चुका था। इस दौरान रानी खेड़ा गांव में महापंचायत चल रही थी।
महापंचायत के बाद सियासत गरमाई
मसला रानी खेड़ा के कूड़ा घर पर ही था। पंचायत में वार्ड पार्षद जयेंद्र डबास मौजूद थे। इसी बीच पंचायत के लिए जा रहे कांग्रेस नेता नरेश लाकड़ा ने पंचायत को कूड़ा उतरने की सूचना दी। आनन-फानन में स्थानीय निवासी मौके पर पहुंचे और कूड़ा डालने का विरोध करने लगे।
दूसरी तरफ गांव से क्रे न मंगाकर सारा कूड़ा तीनों ट्रकों में वापस लाद दिया गया और लोग टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। इसके अलावा कराला-मुंडका व रोहतक रोड पर जाम भी लगा दिया। काफी समझाने के बाद करीब एक घंटे बाद लोग सड़क से हटे। लेकिन देर शाम तक ट्रकों पर लगा कूड़ा नहीं उतर सका।
स्थानीय निवासियों का कहना था कि जहां डंपिंग साइट बनानी है वहां निगम ने अभी तक कूड़ा निपटान का कोई इंतजाम नहीं किया है। इससे कुछ दिनों में रानी खेड़ा में भी गाजीपुर व भलस्वा की तरह कूड़े का पहाड़ लग जाएगा। इससे खेती की बर्बादी होने के साथ हरियाली भी खत्म हो जाएगी।
सोशल मीडिया पर भी प्रचार किया
- फोटो : अमर उजाला
लोगों के विरोध से ट्रक खाली नहीं हो सके। देर शाम तक भारी संख्या में मौके पर पुलिसकर्मी तैनात थे। वहीं, ग्रामीण टेंट लगाकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। ट्रक से मलवा नहीं उतरने के बाद भाजपा पार्षद व नेता सदन जयेंद्र डबास ने लोगों को बताया कि उन्होंने रानी खेड़ा में कचरा नहीं उतरने दिया।
सोशल मीडिया पर भी उन्होंने इसका प्रचार किया। पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी करने पर प्रदेश भाजपा ने इस पर डबास को फटकार भी लगाई। सूत्र बताते हैं कि डबास को प्रदेश भाजपा ने तलब किया और उन्हें पार्टी लाइन पर ही काम करने का निर्देश दिया। हालांकि, डबास पर स्थानीय लोगों का भी दबाव रहा।
बताया जा रहा है कि महापंचायत में पहुंचने पर ग्रामीणों ने सवाल किया कि क्या उन्हें इसलिए पार्षद बनाया गया है कि वह रानी खेड़ा को गंदगी के पहाड़ में तब्दील कर दें। लोगों के गुस्से से निपटने के लिए उन्होंने महापंचायत का समर्थन किया। इसमें कसम दिलाई गई है कि किसी भी हालत में ग्रामीण रानी खेड़ा में डंपिग ग्राउंड नहीं बनने देंगे।