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काली पट्टी बांधकर मनाई ईद, शांतिपूर्ण ढंग से जताया विरोध

Mon, 26 Jun 2017 05:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली मथुरा ईएमयू में 15 वर्षीय जुनैद की हत्या के विरोध में जिलेभर में काली ईद मनाई गई। लोगों ने बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर ईद-उल-फितर की नजाम अता की। किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो इसको लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा।
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मुसलिम समुदाय के लोगों का कहना था कि बीफ खाने के नाम पर हो रहीं मुसलिम समाज के लोगों की हत्याओं का विरोध करने के लिए ये शांतिपूर्ण तरीका अपनाया गया है। ताकि सरकार तक उनकी बात आसानी से पहुंच सके।

उधर,  तावडू में  विरोध प्रदर्शन में नौजवानों की खास भूमिका रही।  डॉ इमरान चौधरी ( रिसर्च स्कालर ) निजामपुर ने  कहा कि काली पट्टी बांध कर केंद्र और राज्य सरकार को ये संदेश देना था कि देश में  इस प्रकार की जो घटनाएं घट रही हैं उन पर लगाम लगनी चाहिए ।
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देश के अंदर अघोषित आपातकाल  जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मजहब के नाम पर जुनैद की हत्या इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हमारे आजाद मुल्क  में बीते दो तीन वर्षों में मुस्लिम समुदाय के लोगों के ऊपर जानबूझ कर जुल्म किया जा रहा है ।

कभी उत्तर प्रदेश में अखलाक की हत्या तो कभी  राजस्थान के अलवर  में पहलु की हत्या और मेवात के तावडू  में डीगरहेडी डबल मर्डर और गैंगरेप मामला। जिसके चलते देश का मुसलमान गुलामों वाली जिंदगी जीने को मजबूर हो रहा है।  
 
साजिश के तहत हो रहे हमले 
कांग्रेस के प्रदेश सचिव अख्तर हुसैन काटपुरी का कहना है कि मेवात हरियाणा और मेवात राजस्थान में जहां-जहां बाजुओं में काली पटटी बांधकर ईद मनाई गई है इसका एक ही मकसद है कि अपनी आवाज को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री  तक पहुंचाना। उनका आरोप था कि जब से देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है मुसलमानों पर एक साजिश के तहत हमले कराए जा रहे हैं। इनकों रोकना होगा।
 
नहीं रुक रहीं घटनाएं 
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व परिवहन मंत्री आफताब अहमद का कहना है कि काली पट्टी बांधकर लोगों ने जो विरोध किया है, इसको किसी राजनीति पार्टी ने समर्थन नहीं दिया इसके बावजूद भी लोगों में इतना गुस्सा देखा गया कि मेवात के अधिकतर गांवों में लोगों ने अपने जज्बातों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आसान तरीका अपनाया है।

आज देश के मुसलमान अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भाजपा के राज में 20 से अधिक लोगों की तो बीफ खाने का आरोप लगाकर हत्या कर दी गई। मेवात के पहलु अब जुनैद तथा पिछले साल डीगरहेडी में दो बहनों का गैंगरेप और दंपति की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। आज देश के मुसलमानों का मनोबल कमजोर हो रहा है। अंग्रेज, मुगलों से लोहा लेने वाले मेवाती आज दूसरें राज्य और जिलों में जाने से डर रहा है।

काली पट्टी निशुल्क देने के लिए लगी थीं स्टॉलें 
फिरोजपुर झिरका। ईदगाह में नमाज अता करने के लिए आने वालों को काली पट्टी देने के लिए ईदगाह के बाहर अलग से स्टॉल लगाए गए थे। यहां पर कार्यकर्ता ईदगाह में जाने वालों को काली पट्टी बंाध रहे थे। बच्चे हो या बूढे़ सभी को काली पट्टी दी जा रही थी। 

गिले- शिकवे दूर कर ईद की मुबारकबाद दी
ईद-उल फितर की नमाज अता करने के लिए सुबह से ही लोग नए-नए रंग बिरंगे परिधान पहनकर शहर की ईदगाह में आने शुरू हो गए। लोगों ने गांव की ईदगाह में दुकाना यानी ईद कि नमाज अता की और इलाका-ए-मेवात के साथ-साथ देश में अमन शांति की दुआ मांगी गई।

मौलाना जहीर अहमद का कहना है कि रमजान माह में अल्लाह के हुक्म से गरीब और बेसहारा लोगों की जकात और फितरा देकर उनकी मदद करनी चाहिए। गरीबों को फितरा और जकात मालदार लोगों पर देना जरूरी है ने देने पर वे गुनाहगार होते हैं।

नमाज अता करने के बाद लोगों ने गले मिलकर एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। बता दें कि रमजान में लोग अल्लाह को राजी करने के पूरे माह रोजे रखते हैं उसके बाद 29 या 30 चांद की तारीख को चांद देखने के बाद ईद का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस दिन बच्चे, बूढ़े, नौजवान सभी नए नए कपड़े पहनकर गंाव की ईदगाह मस्जिद में दो रकात नमाज अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिये पढ़ने जाते हैं।
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