मोहित शुक्ला
पूर्वी दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों के ढहने के दर्दनाक हादसों के बावजूद प्रशासनिक तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत ढहने से कई लोगों की मौत के बाद अवैध और जर्जर निर्माणों के खिलाफ सख्ती के दावे किए गए थे। इसके बावजूद सुंदर नगरी के जी-ब्लॉक में स्थिति अलग तस्वीर पेश कर रही है। यहां पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में खाली कराई गई झुकी हुई छह मंजिला इमारत में लोग दोबारा रहने लगे हैं। इमारत की हालत को देखते हुए इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
सत्य निकेतन में नियमों की अनदेखी कर किए जा रहे निर्माण के दौरान इमारत ढह गई थी। हाल ही में तिमारपुर में दीवार गिरने से भी लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना सामने आई। इन हादसों के बावजूद सुंदर नगरी में छह लेंटर वाली यह कथित अवैध इमारत खुलेआम खतरे को न्योता दे रही है। रविवार को पुलिस बल की मौजूदगी में इसे खाली कराया गया था, लेकिन प्रशासनिक निगरानी हटते ही सभी मंजिलों पर लोग फिर लौट आए। संकरी गली में आसपास बने मकानों के लिए भी झुकी हुई इमारत गंभीर खतरा बनी हुई है।
दिल्ली नगर निगम के शाहदरा उत्तरी क्षेत्र स्थित कार्यकारी अभियंता (एम-1) कार्यालय ने 5 अक्तूबर 2026 को पत्र संख्या 349 जारी कर संपत्ति संख्या G-4/47 (स्टीफन डिस्पेंसरी के पास) को अति खतरनाक श्रेणी में रखा था। कनिष्ठ अभियंता के निरीक्षण में भूतल से पांचवीं मंजिल तक बनी कॉर्नर इमारत की दीवारों में गहरी दरारें मिली थीं। निगम ने तत्काल इमारत खाली कराने और संरचनात्मक सुरक्षा जांच होने तक प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद नोटिस चस्पा होने के 24 घंटे के भीतर ही आदेशों की अनदेखी शुरू हो गई।
काटे गए बिजली कनेक्शन भी दोबारा जुड़े
खतरे को देखते हुए बीएसईएस के नंद नगरी डिविजन ने 6 अक्तूबर को आपातकालीन नोटिस जारी किया। इमारत के जर्जर हिस्से के पास पांच बिजली मीटर और केबल लगे होने से शॉर्ट सर्किट और आग का खतरा बताया गया। रविवार को खाली कराने के दौरान काटे गए बिजली कनेक्शन मंगलवार को दोबारा जोड़ दिए गए। बीएसईएस ने किसी हादसे की जिम्मेदारी मकान मालिक पर डाली है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के चलते उन्हें सत्य निकेतन जैसे किसी बड़े हादसे की आशंका सता रही है।