श्रमिक के वेतन से रुपये काटने के मामले में सहायक श्रमायुक्त सर्कल-6 के रमेश कुमार आहूजा की श्रम अदालत ने सुनवाई करते हुए कंपनी प्रबंधन पर 44 हजार 400 रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कंपनी प्रबंधन को श्रमिक के काटे गए 88 हजार 800 रुपये का भुगतान करने के भी आदेश दिए हैं। अदालत ने 25 जुलाई तक इस राशि का भुगतान करने को कहा है। ऐसा न करने पर कंपनी पर 10 फीसदी वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।
अधिवक्ता राजेंद्र पाठक ने बताया कि राजीव नगर निवासी महेश कुमार वर्ष 2013 से आईएमटी मानेसर स्थित सुब्रोस कंपनी में कार्यरत था। कंपनी द्वारा उसे प्रतिमाह 14930 रुपये वेतन दिया जाता था। कंपनी प्रबंधन द्वारा महेश को विशेष भत्ते के नाम पर प्रतिमाह 2775 रुपये की दी जाने वाली राशि काटी जाने लगी।
श्रमिक ने प्रबंधन से इस बारे में बात की तो काटी गई धनराशि को वेतन में समायोजित करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। प्रबंधन ने उसका तबादला कंपनी की अन्य शाखा में कर दिया और उसके कुछ दिन बाद उसे नौकरी से निकाल दिया।
मई 2017 में श्रमिक ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ अदालत में मजदूरी एक्ट 1936 के तहत याचिका दायर की। मामला अदालत में चला। अदालत ने श्रमिक द्वारा पेश किए गए दस्तावेज के आधार पर यह फैसला सुनाया है।