नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन और हिंसा की कवरेज कर रहे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को निशाना बनाया जा रहा है। दिल्ली से लेकर असम और पश्चिम बंगाल तक में कई पत्रकार सुरक्षा बलों का निशाना बन चुके हैं। सोमवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने इन घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सरकार से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।
रविवार को दिल्ली के जामिया विवि के आसपास हुई हिंसा में भी एक महिला पत्रकार ने दिल्ली पुलिस पर बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। वहीं, अलीगढ़ और गुवाहाटी में भी कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ सुरक्षा बलों के गलत बर्ताव की सूचनाएं हैं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अनुसार, वे सुरक्षा बलों की चुनौती और कार्य को भलीभांति समझते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लोकतंत्र की आवाज को ही दबा दिया जाएगा। पत्रकारों पर हमलों का कड़े शब्दों में विरोध किया जाता है। केंद्र सरकार को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों के पुलिस अधिकारियों को आदेश जारी करने चाहिए।