अगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ऑब्जर्वर की नियुक्ति कर सकती है। इन्हीं के मार्फत पार्टी जमीनी नेताओं का चुनाव करने की कवायद करेगी। शनिवार को हुई बैठक में संगठन को मजबूत करने के लिए फेरबदल पर चर्चा हुई। बैठक में उस कमेटी की रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई, जिसने लोकसभा चुनाव में हार के बाद समीक्षा की है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसी सूचना मिली थी कि ब्लॉक स्तर पर कई सिफारिशी नेताओं को नियुक्त कर दिया गया है। उन्होंने पार्टी के प्रचार और संगठन को मजबूत करने का कोई प्रयास नहीं किया।
ब्लॉक कमेटी को भंग करने पर कांग्रेस के कई दिग्गज नेता नाराज हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी से सिर्फ एक महीने का मोहलत मांगने के बाद सबसे निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को निराश करना कही से जायज नहीं है। हार के बाद ब्लॉक कमेटियां ही क्यों, पूरी कार्यकारिणी को भंग करना चाहिए। कोई भी चुनावी हार सामूहिक होती है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव काफी नजदीक हैं। ऐसे में एक बार फिर संगठन खड़ा करना मुश्किल है। हार के लिए कार्यकर्ता से लेकर कार्यकारी अध्यक्ष और अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान सभी ने मिलकर काम करने का वादा किया था, लेकिन आधे घंटे के अंदर ही ब्लॉक अध्यक्षों पर गाज गिर गई।