नरेला-बवाना में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। सालों से निर्माण स्थल के ऊपर से गुजरने वाले हाइटेंशन विद्युत तार परियोजना की राह रोके हुए हैं, लेकिन अब एमसीडी के सदन से हाइटेंशन तारों को हटाने में खर्च होने वाले बजट के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। जल्द ही परियोजना का काम आरंभ हो जाएगा।
इस परियोजना के लिए नरेला-बवाना में 35 एकड़ की भूमि निगम ने चिन्हित की है। प्रस्तावित स्थल के मध्य से 400 केवी की तीन हाइटेंशन विद्युत लाइनें (डीटीएल की एक, पावरग्रिड की दो लाइनें) गुजर रही हैं। सितम्बर 2022 में बिजली कंपनियों के साथ निगम की बातचीत के बाद इनमें से एक लाइन को मल्टी सर्किट टावर्स पर स्थानांतरित करने पर सहमति बनी। दोनों कंपनियों ने शर्त रखी कि इस काम में आने वाले 24,66,03,452 रुपयों के खर्च का ऑनलाइन भुगतान निगम करेगा। इस मसौदे को निगम के वित्त विभाग ने पहले से मंजूर कर लिया था। अब निगम सदन से इसे मंजूर किया गया है।
हर दिन 3000 टन कचरे से बनेगी बिजली : नरेला-बवाना में हरदिन 3000 टन कचरे से बिजली बनाने के लिए वेस्ट टू एनर्जी प्लांट सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) से बनाया जाना है। निगम के एकीकरण के बाद विशेष अधिकारी रहे अश्वनी कुमार ने स्थायी समिति की शक्तियों का उपयोग करते हुए इस परियोजना को जुलाई 2022 में मंजूर किया। इस परियोजना में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय से यूडीएफ के अंतर्गत 151 करोड़ का वित्त पोषण भी मिलना है। यह दिल्ली का सबसे बड़ा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट होगा।
निगम के तीन वेस्ट टू एनर्जी प्लांट चल रहे : मौजूदा समय गाजीपुर लैंडफिल साइट पर हरदिन 1300 टन कचरे की खपत वाला, भलस्वा में हरदिन 1500 मीट्रिक टन और ओखला तेहखंड में हरदिन 2000 टन कचरे की खपत वाले तीन वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगे हैं। इनमें से तेहखंड प्लांट की क्षमता 50 फीसदी तक बढ़ाने की योजना है। अगस्त 2024 तक नरेला-बवाना में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बनकर तैयार करने का लक्ष्य है।
हाइटेंशन लाइन हटने से 15 एकड़ भूमि होगी फ्री
परियोजना स्थल पर एक हाइटेंशन विद्युत लाइन स्थानांतरित होने के बाद करीब 15 एकड़ भूमि फ्री होगी। बिजली कंपनी को स्थानांतरण खर्चे की रकम मिलते ही तारों को हटाने का काम भी शुरू किया जाना है। भूमि खाली होने के बाद तेजी से इस परियोजना पर काम शुरू होगा।