सूबे के दस जनपदों में अब ड्राइविंग लाइसेंस पासपोर्ट की तर्ज पर ही जारी किए जाएंगे। इसके लिए पहले ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ऑनलाइन फीस जमा करानी होगी और ऑनलाइन ही एप्वाइंटमेंट लेना होगा।
निर्धारित समय पर आरटीओ कार्यालय पहुंचकर दस्तावेजों की जांच और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था 7 मार्च से गाजियाबाद-नोएडा के साथ ही कानपुर देहात, आगरा, मेरठ, इलाहाबाद, अलीगढ़, बरेली, सहारनपुर और झांसी में शुरू होने जा रही है।
एआरटीओ प्रशासन केपी गुप्ता ने बताया कि अपर परिवहन आयुक्त सड़क सुरक्षा और आईटी ने आदेश जारी कर दिए हैं। सात मार्च तक एनआईसी से सभी आरटीओ आफिसों को सिस्टम अपडेट कराना होगा।
उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग काफी समय से डीएल की ऑनलाइन प्रक्रिया पर विचार कर रहा था। लखनऊ में इसका ट्रायल किया गया, जोकि सफल रहा था।
इसके बाद सूबे के 10 जिलों में डीएल की आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। 7 मार्च के बाद मैनुअल आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आवेदकों को परिवहन विभाग के सारथी साफ्टवेयर पर पहुंचकर लर्निंग डीएल के सामने क्लिक करना होगा।
आवेदन के साथ ही अपने एड्रेस और जन्म तिथि के प्रूफ का विवरण देना होगा। लाइसेंस की फीस भी ऑनलाइन ही जमा करानी होगी। इसके साथ ही आवेदक को टाइम स्लाट मिल जाएगी।
निर्धारित समय पर आरटीओ आफिस पहुंचकर अपने दस्तावेज सत्यापित कराने होंगे। इसके बाद टेस्ट और बायोमेट्रिक की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अब डीएल में मनमानी नहीं चलेगी।
यह होगा फायदा
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होने से सभी को वैध कागजात लगाने होंगे। विधिवत परीक्षा देनी होगी और डीएल भी रजिस्टर्ड डाक से मिलेगा। दलालों की मनमानी रुकेगी और डीएल में फर्जीवाडे़ पर भी लगाम कसेगी।
यह होगी परेशानी
आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होने से लोगों को नुकसान होगा। ज्यादातर केपास ऑनलाइन आवेदन की न तो सुविधा है और न ही इसकी जानकारी। ऐसे में दलाल अपना लैपटाप-कंप्यूटर सिस्टम लेकर आवेदन करेंगे या फिर साइबर कैफे पर जाना होगा।
इसकेलिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे। गांव-देहात के आवेदकों को इससे ज्यादा परेशानी का सामना करना होगा। परिवहन विभाग को मैनुअल सिस्टम को भी चालू रखना चाहिए था।