विधानसभा चुनाव को लेकर आयाराम-गयाराम की राजनीति शुरू हो गई है। कोई हाथी
को छोड़कर पंजा पकड़ रहा है, तो कोई पंजा छोड़कर चश्मा पहन रहा है, जबकि
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव रहे पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना अभी असमंजस
की स्थिति में हैं।
कहां और किस हालात में किसके साथ जाएं अभी तय नहीं कर
पाए। इस कड़ी में बसपा से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके राजेन्द्र शर्मा ने
पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया।
झाड़ू वाली टोपी पहनकर सिद्धांत
और ईमानदारी की लंबी-लंबी बात करने वाले निगम पार्षद जगन डागर भी अपना
भविष्य अब कांग्रेस में तलाश रहे हैं।
बहुतों ने कांग्रेस का थामा दामन
शुक्रवार को रोहतक के सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने दिल्ली हरियाणा भवन में
राजेन्द्र शर्मा और पार्षद जगन डागर को पार्टी में शामिल किया।
अमर उजाला
से बातचीत में शर्मा ने कहा कि चुनाव के बाद पार्टी ने उन्हें लावारिस की
तरह छोड़ दिया था। न तो पार्टी का कोई बड़ा पदाधिकारी कभी संपर्क करता था
और न ही किसी पार्टी के किसी कार्यक्रम में उन्हें बुलाया जाता था।
कांग्रेस एक बड़ी पार्टी है। मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने पूरा
मान-सम्मान देने का भरोसा दिया है, इसलिए वह कांग्रेस के साथ जुड़कर समाज
के लिए काम करेंगे।
आप के उम्मीदवार कांग्रेस में हुए शामिल
पिछले दिनों आम आदमी पार्टी ने हरियाणा में विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान
कर दिया था। इस बात से पार्षद जगन डागर परेशान थे कि अब कहां जाएं।
उनका
कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने उन्हें कांग्रेस में
शामिल होने का न्योता दिया था। अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने के लिए वह
कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
उधर, महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश
उपाध्यक्ष रहीं डॉ. राधा नरूला ने पंजे को अलविदा कहकर इनेलो का चश्मा पहन
लिया है। कांग्रेस के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बीआर ओझा का कहना है कि ऐसे लोग
मौकापरस्त हैं। इनके आने-जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पार्टी
हाईकमान को इससे अवगत करा दिया गया है।