'नकारात्मकता को मर्यादा में रखकर राष्ट्र निर्माण पर ध्यान दें'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'मेरी एक चिंता रही है लंबे समय से सदन में जो पहली बार चुनकर आए हैं, या जो युवा हैं, वैसे सभी दलों के सभी सांसद बहुत परेशान हैं, उन्हें अपने सामर्थ्य का परिचय कराने का अवसर नहीं मिल रहा है और न ही अपने क्षेत्र की समस्याओं के बारे में बताने का मौका नहीं मिल रहा है। कोई भी दल हो हमें किसी को भी हमारी नई पीढ़ी के नौजवान सांसदों को, उन्हें अवसर देना चाहिए। इसलिए मेरा आग्रह रहेगा कि हम इन चीजों को गंभीरता से लें, ड्रामा करने के लिए बहुत जगह होती है, जिसे करना है करता रहे, यहां ड्रामा नहीं डिलीवरी होनी चाहिए। नारे के लिए पूरा देश पड़ा है, जहां हारे वहां बोल चुके और जहां हारने जा रहे हैं, वहां भी बोल लेना। यहां नारे नहीं नीति पर बात होनी चाहिए। हो सकता है कि राजनीति में नकारात्मकता कुछ काम आती होगी लेकिन राष्ट्र निर्माण की सोच भी होनी चाहिए। नकारात्मकता को मर्यादा में रखकर राष्ट्र निर्माण पर ध्यान दें।'
'हमारे देश के मीडिया के मित्र अगर समीक्षा करेंगे तो उन्हें ध्यान में आएगा कि पिछले कुछ समय से हमारे सदन का या तो चुनाव के वार्मअप के लिए तो कभी चुनाव की बौखलाहट के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये सारा गुस्सा सदन में निकालते हैं और सदन को राज्य की राजनीति के लिए इस्तेमाल करने की परंपरा को कुछ दलों ने जन्म दिया है। अब उन्हें चिंतन करना चाहिए कि अब वे अपनी रणनीति बदलें, मैं टिप्स देने के लिए तैयार हूं। लेकिन कम से कम सांसदों को अभिव्यक्ति का अवसर दीजिए। अपनी निराशा और पराजय की बलि सांसदों को मत बनाइए। मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि देश नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है, धन्यवाद।'
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