- निजी स्कूलों की बढ़ी फीस और नाम काटने के डर से परेशान परिवार, पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में निजी स्कूलों की बढ़ी फीस को लेकर चल रहा विवाद अब अभिभावकों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। गैर-मंजूर फीस वसूली और छात्रों के नाम काटे जाने के आरोपों के बीच अभिभावक अपने कामकाज छोड़कर स्कूल, कोर्ट और शिक्षा निदेशालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। मयूर विहार फेज-3 स्थित एक निजी स्कूल के बाहर बृहस्पतिवार को भी अभिभावकों की भीड़ जुटी रही। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल ने 17-18 छात्रों के नाम काट दिए हैं। मामले की जांच के लिए शिक्षा निदेशालय की टीम भी स्कूल पहुंची।
एक अभिभावक ने बताया कि फीस विवाद के चलते पिछले एक सप्ताह से वह नियमित रूप से दफ्तर नहीं जा पा रहे हैं। बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें रोजाना स्कूल और शिक्षा निदेशालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि हालात ऐसे हैं कि बच्चे को स्कूल छोड़ने के कुछ देर बाद ही वापस बुला लिया जाता है। हाल ही में बुधवार को एक बच्चे को स्कूल छोड़ने गए थे तो 15 मिनट बाद फोन आया कि बच्चे को वापस ले जाएं।
शिक्षा निदेशालय की टीम पहुंची स्कूल
बृहस्पतिवार को भी बच्चे को स्कूल छोड़ने गया था। स्कूल की ओर से फिर कॉल आना शुरू हो गया कि बच्चे को ले जाएं। जब कुछ अभिभावक गेट नंबर एक पर पहुंचे तो गार्ड ने बताया कि बच्चों को वहीं लाया जाएगा। हालांकि शिक्षा निदेशालय की टीम के स्कूल में पहुंचने पर बच्चे की स्कूल से निर्धारित समय पर छुट्टी हुई। बच्चे का कहना था कि वह पहले अपनी नई क्लास में गया। पांच-दस मिनट बाद एक टीचर ने उन्हें वहां से ले जाकर कॉन्फ्रेंस रूम में बिठा दिया। लंच खत्म होने के बाद उन्हें वापस क्लास में भेज दिया।
दफ्तर की जगह कोर्ट में बीता दिन
द्वारका के एक अन्य अभिभावक चंदन ने बताया कि उनके बच्चे का नाम भी काट दिया गया है। बच्चा स्कूल तो जा रहा है, लेकिन उसे न तो क्लास ग्रुप से जोड़ा गया है और न ही पढ़ाई से जुड़ी जानकारी मिल रही है। उन्होंने कहा कि गुरुवार का पूरा दिन दफ्तर की जगह कोर्ट में बीत गया। फीस विवाद ने अभिभावकों की दिनचर्या के साथ बच्चों की पढ़ाई को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।