घातक नुकसान के चलते प्लास्टिक के प्याले में चाय पीना बंद करने और कागज कप का प्रयोग करने वालों के लिए चौंकाने वाली खबर है। जिस प्याले को पेपर का मानकर सुरक्षित समझा जा रहा था, वह बेहद खतरनाक है।
स्वास्थ्य मानकों के चलते इसमें चाय या कोई गर्म पेय प्रयोग नहीं किया जा सकता। इनमें लगाया जाने वाला गोंद और केमिकल सेहत के लिए खतरनाक हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन प्यालों को बनाने में रिसाइकिल कर पेपर का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में पेपर पर पहले के कई घातक केमिकल लगे होते हैं। इनको साफ करने की कोई विधि अभी तक प्रचलन में नहीं है।
यह है असली नुकसान
इससे बने प्यालों को सुरक्षित रखने के लिए कार्बाडिज्म पेस्टीसाइड-फंजीसाइड का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही प्यालों को मशीनों से जोड़ने के लिए इनमें गोंद लगाए जाते हैं।
प्यालों में गर्म चाय-कॉफी आदि पदार्थ डालने से गोंद और रसायन इसमें घुल जाते हैं। पेय पदार्थ केसाथ ये शरीर में प्रवेश करते हैं।
इससे आंतों में सूजन- कैंसर, गलें में एलर्जी-कैंसर, गुर्दों में सूजन-कैंसर होने का खतरा 20 गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा ब्लड कैंसर, टीबी और ब्रेन अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
पेपर का प्याला, प्लास्टिक के प्याले का ही बदला हुआ रूप है। पेपर के नाम पर यह लोगों को धोखा दिया जा रहा है। इसमें घातक रसायन और कीटनाशक मिले होते हैं। इनमें चाय-कॉफी लेने से हार्ट अटैक और ब्लड वेन ब्लाक होने के मामले 20 गुना तक बढ़ जाते हैं। इनका प्रयोग सेहत के लिए भयंकर खतरा है। - डा. वीके द्विवेदी, विशेषज्ञ केमिकल साइंस।
प्रिंट पेपर में खाद्य पदार्थ को रखकर बेचना अपराध है, लेकिन पेपर-प्लास्टिक के कप-प्लेट पर अभी तक कार्रवाई नहीं की जाती है। विभाग की ओर से इनकी जानकारी मांगी गई थी, रिपोर्ट बनाकर भेज दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इनमें खाना-पीना बेहद घातक है। जल्द ही इनके खिलाफ आदेश आने वाला है। इसके साथ ही इनके सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। - विनीत कुमार यादव, डीओ फूड सेफ्टी।