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पाक हाईकमीशन में बैठा अधिकारी कर रहा था ISI जासूस की मदद

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पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के जासूसों की गिरफ्तारी के मामले में नया खुलासा हुआ है। दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाईकमीशन का एक अधिकारी भारत में मौजूद आईएसआई के जासूसों की मदद कर रहा था।
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दिल्ली पुलिस इस अधिकारी की पहचान के लिए गृहमंत्रालय के जरिये विदेश मंत्रालय की सहायता ले रही है। इधर कैफेतुल्लाह खान और बीएसएफ के निलंबित जवान अब्दुल रशीद के खिलाफ ऑफीशियल सीक्रेट एक्ट (ओएसए) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी को लेकर गृहमंत्रालय को रिपोर्ट दे दी है। संयुक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि  कैफेतुल्लाह ने खुलासा किया है कि उसे भारत के खिलाफ नया टास्क देने के लिए पाकिस्तान बुलाया जा रहा था, हालांकि  उसे दिए जाने वाले टास्क की जानकारी नहीं थी।
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आईएसआई हैंडलर ने उसे पाकिस्तान आने को कहा था

वह धार्मिक कार्यक्रम इज्तमा में भाग लेने भोपाल जा रहा था। भोपाल से लौटने के बाद वह पाक हाई कमीशन वीजा बनवाने के लिए जाने वाला था। सरहद पार बैठे आईएसआई हैंडलर ने उसे पाकिस्तान आने को कहा था।

हैंडलर ने उसे निर्देश दिए थे कि वह दिल्ली स्थित पाक हाई कमीशन जाए। वहां रिकंमेंडेशन लेटर दिखाने पर उसका पाकिस्तान का वीजा बन जाएगा।

रिकंमेंडेशन लेटर देखकर हाई कमीशन में बैठा अधिकारी उसकी सहायता करेगा। साथ ही निर्देश दिए थे हाई कमीशन के अंदर से एक व्यक्ति आएगा।

कौन सा अधिकारी है जो कैफेतुल्लाह की सहायता कर रहा था

उससे कहा गया था कि हाईकमीशन में बैठा वह व्यक्ति उसका पाकिस्तान जाने का वीजा बनवा देगा। अपराध शाखा के अधिकारियों का कहना है कि इस बात की तफ्तीश की जा रही है कि पाकिस्तान हाई कमीशन में बैठा वह कौन सा अधिकारी है जो कैफेतुल्लाह की सहायता कर रहा था।

संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि कैफेतुल्लाह दो साल से भारत में कई सिक्योरिटी एजेंसी और सुरक्षा बलों की गुप्त व संवेदनशील सूचना पाकिस्तान को मुहैया करा रहा था।

कैफेतुल्लाह सबसे ज्यादा गुप्त सूचना अपने ममेरे भाई व बीएसएफ के हवलदार अब्दुल रशीद से लेता था। उसने सूचना लेने के लिए सेना में लोगों को भर्ती करवाने का प्रयास भी किया था।
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ई-मेल, वाट्सऐप व वीबर के जरिये गुप्त सूचनाएं जाती थीं

वह रजौरी जिले के मंजाकोटे में स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में लाइब्रेरी असिस्टेंट था। वर्ष 1993 में जम्मू कश्मीर पुलिस में सेलेक्शन हो गया था। इसने ट्रेनिंग लेने के बाद जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस में करीब तीन वर्ष नौकरी की।

वर्ष 1995 में उसे लाइब्रेरी असिस्टेंट की नौकरी मिल गई तो इसने पुलिस की नौकरी छोड़ दी। वर्ष 2013 में गुजरांवाला, पाकिस्तान गया। यह पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटिव के हैंडलर के संपर्क में आया।

इसे मोटी रकम का लालच दिया गया था। भारत आकर ये ई-मेल, वाट्सऐप व वीबर के जरिये गुप्त सूचनाएं देने लगा। पुलिस के मुताबिक आरोपी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज आईएसआई हैंडलर को दे चुका है।

इनमें एयरबेस की स्थिति सेना और बीएसएफ की मूवमेंट, पुलिस पोस्ट और सेना के प्लान की गुप्त सूचनाएं भी शामिल थीं। उसके कब्जे से काफी संवेदनशील व गुप्त दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
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