डीजी (जेल) अजय कश्यप ने बताया कि तिहाड़ जेल में कैदियों के लिए सुधार कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। वहां कई तरह के उत्पाद बनते हैं। कैदियों के लिए तिहाड़ स्कूल ऑफ आर्ट का संचालन भी किया जाता है, जिसमें उन्हें पेंटिंग और संगीत आदि की बारीकियां भी सिखाई जाती हैं। तिहाड़ से निकलकर कुछ कैदियों ने अपने रॉकबैंड बनाए हैं। जेल का मकसद कैदी को सजा देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुधारना भी है।
कला प्रदर्शनी में 16 कैदियों द्वारा बनाई गई सात पेंटिंग और 14 मूर्तियों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के आयोजकों ने केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन एवं उनकी पत्नी नूतन हर्षवर्धन को कैदियों द्वारा बनाया गया उनका स्केच प्रदान किया।
नूतन ने कहा कि इन कैदियों ने अपनी कला के माध्यम से बहुत अच्छे-अच्छे संदेश दिए हैं, जिससे पता चलता है कि हर किसी को एक मौके की जरूरत होती है। यदि सही मौका दिया जाए तो लोगों की प्रतिभा सामने आती है। कार्यक्रम के दौरान मूर्तिकार राम सुतार सहित कई लोग मौजूद रहे। अतिथियों ने आर्ट लाइफ गैलरी की संयोजिका प्रीति बजाज व प्रतिभा अग्रवाल के प्रयासों की सराहना की।