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पद्म विभूषण विदुषी कपिला वात्स्यायन का 91 वर्ष की आयु में निधन, कला जगत में शोक की लहर

Wed, 16 Sep 2020 01:53 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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कपिला वात्स्यायन - फोटो : सोशल मीडिया
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दिल्ली में 25 दिसम्बर 1928 को जन्मीं पद्म विभूषण विदुषी कपिला वात्स्यायन का बुधवार को सुबह 9 बजे गुलमोहर एनक्लेव स्थित उनके निवास स्थान पर निधन हो गया। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर है। वह 91 वर्ष की थीं। सालों से वह एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थीं।

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वह हिंदी के यशस्वी दिवंगत साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' की पत्नी थीं। साठ के दशक से वह अपने पति से अलग होकर एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थीं। उन्होंने साहित्य, कला और संस्कृति के संवर्धन में अपना पूरा जीवन लगा दिया था।

कपिला वात्स्यायन की शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय, अमेरिका के मिशिगन विश्विद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पूरी हुई थी। वह प्रख्यात नर्तक शंभू महाराज और इतिहासकार वासुदेव शरण अग्रवाल की भी शिष्या रहीं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की संस्थापक, संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी से फ़ेलोशिप और अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सुसज्जित कपिला वात्स्यायन का पूरा जीवन लोगों के लिए आदर्श बना रहा। कुछ समय पहले तक वह इंडिया इंटरनेशनल के एशिया प्रोजेक्ट की अध्यक्ष भी थीं।
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वर्ष 2006 में उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया था। लेकिन लाभ के पद का विवाद शुरू हो जाने पर उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन बाद में उन्हें फिर से इस पद के लिए मनोनीत किया गया। प्रख्यात संस्कृति कर्मी अशोक बाजपेई ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने उनको याद करते हुए कहा है कि कपिला वात्सायन महान विदुषी और विलक्षण प्रतिभा की महिला थीं। 

लोधी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार

इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मौजूदा सचिव व आजीवन ट्रस्टी कंवल अली ने कपिला वात्स्यायन के निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के कारण सीमित के लोगों की मौजूदगी में ही दोपहर दो बजे लोधी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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