"मरवाएगा के, मीडिया वाले खड़े हैं, कुछ न सुनूं मैं"
चेकिंग अभियान के दौरान वैन चालक पहले तो पुलिसकर्मी के समक्ष हाथ पैर जोड़ते दिखे। मगर जब बात नहीं बनी तो हर कोई किसी न किसी से उनसे फोन पर बात करने के लिए कह रहा था। एक चौक पर तो वैन चालक ने किसी पुलिसकर्मी का नाम लेते हुए कहा कि वे बात करना चाहते हैं, मगर पुलिसकर्मी ने कोई बात करने से इंकार कर दिया। हालांकि दूसरे ही पल पुलिसकर्मी ने फोन लेकर कहा कि ‘मरवाएगा के, मीडिया वाले खड़े हैं, कुछ न सुनूं मैं’ और फोन लौटा दिया। पुलिसकर्मी ने वैन चालक का चालान करके उसे रवाना किया।
100 रुपये के चालान से नहीं डरता कोई
लचर कानून होने के कारण वैन चालक पुलिस की कार्रवाई से नहीं डरते हैं। जांच के दौरान एक पुलिसकर्मी ने बताया कि क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने का पहली बार चालान 100 रुपये है और दूसरी बार 400 रुपये है। ऐसे में कोई भी वैन चालक कार्रवाई से नहीं डरता है। उन्होंने कहा कि शायद नए यातायात कानून और जुर्माने के प्रावधान से लोगों में डर बैठेगा और उल्लंघन करने के मामलों में कमी आएगी।
अभिभावक भी समझें जिम्मेदारी
पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने बताया कि अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा, मगर चालान की कार्रवाई से ज्यादा अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जिस वैन में 17 बच्चे बैठकर जा रहे हैं, क्या उनके अभिभावकों को नहीं पता होगा कि उनका बच्चा किस हाल में आता है। ऐसे में वे उसे स्कूल बस या फिर दूसरी वैन में भी भेज सकते हैं।