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दिल्ली से आउट पर नोएडा में सरपट दौड़ती डग्गामार

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इन्हें न नियम-कानून का खौफ है, न ही कागजातों की जरूरत। ये सवारियों के लिए भी मुसीबत का सबब बन गई हैं। ये डग्गामार बसें हैं।
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भले ही इन्हें दिल्ली से आउट कर दिया गया हो, लेकिन नोएडा में धड़ल्ले से ये दौड़ रही हैं। इनकी तादाद करीब 150 है।

सरकार को इनसे राजस्व नहीं मिलता, लेकिन नियम-कायदे तोड़ने के एवज में लाखों का मुनाफा कहीं न कहीं जाता है।

सवाल उठना लाजिमी है कि कानून तोड़ने की परमिशन देता कौन है और क्या प्रशासन को इसकी खबर नहीं है। जबकि, ज्यादातर बसें पुलिस चौकियों के सामने दौड़ती हैं।

सेक्टर 12/22 से हापुड़, मोदीनगर, मेरठ, सेक्टर 37 से बदरपुर, महरौली, गाजियाबाद, गोल चक्कर से ग्रेटर नोएडा, दादरी सहित तमाम रूटों पर डग्गामार बसों का संचालन हो रहा है।
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पैसा फेंको, बसें चलाओ!

ऐसा नहीं कि डग्गामार बसों की मनमानी से सरकारी तंत्र अंजान है।

बताया जा रहा है कि नियमों को रौंदने की एवज में ट्रैफिक पुलिस व थाना पुलिस से लेकर परिवहन विभाग तक को हर महीने मोटी फीस जाती है।

500 से 1000 रुपये तक एंट्री के नाम पर डग्गामार बस ऑपरेटरों से वसूले जाते हैं।

ब्लेडमार गिरोह सक्रिय

इन डग्गामार बसों में ब्लेड मार गिरोह का आतंक है। सवारियां खौफ के साये में सफर करने को मजबूर हैं।

जेब काटते पकड़े जाने पर जेब कतरे ब्लेड मारकर रफूचक्कर हो जाते हैं।

पिछले साल एक सिपाही को ब्लेड मारकर घायल करने की घटना सामने आई थी।
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जबरन उठाते हैं सवारियां

डग्गामार बसों में बस चालकों और कंडक्टरों की गुंडागर्दी साफ देखी जा सकती है।

सेक्टर 37 से संचालित होने वाली बसों में सवारियों को जबरन बस के अंदर खींच लिया जाता है।

विरोध करने पर मनमाना किराया वसूलकर बीच रास्ते में ही उतार दिया जाता है। अधिकांश श्रमिक वर्ग इन बसों में सफर करता है।

ट्रैफिक इंस्पेक्टर, धर्मेंद्र सिंह यादव का कहना है कि समय-समय पर डग्गामार बसों के खिलाफ चेकिंग का अभियान चलाया जाता है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर इन बसों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
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