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मेडिकल हब में बढ़ रहा है अंगदान का ग्राफ

Sun, 07 Feb 2016 12:45 PM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
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गुड़गांव। मेडिकल हब गुड़गांव में ब्रेन डेड से अंगदान का ग्राफ बढ़ रहा है। बीते पांच साल में 0.29 फीसदी बढ़ोतरी हुई है।
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बेहतर मेडिकल सुविधा होने के कारण उत्तर भारत के दूसरे शहरों के मुकाबले यहां ब्रेन डेड के बाद अंग प्रत्यारोपण ज्यादा हो रहे हैं।

एक महीने में केवल गुड़गांव के अस्पताल से दो ब्रेन डेड से सात लोगों की जान बचाई जा चुकी है। इसमें ग्रीन कॉरिडोर सबसे ज्यादा सहायक बना।

आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते कुछ साल में विभिन्न संस्थाओं और सरकार के प्रयास से ब्रेन डेड व्यक्ति से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

2014 में यह आंकड़ा .34 फीसदी पहुंच गया है, जबकि 2015 के लिए डाटा संकलन का काम चल रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो यहां आंकड़ा करीब 0.38 फीसदी तक पहुंच जाएगा।

पूरे देश में 411 ब्रेन डेड लोगों से 1150 लोगों में सफल अंग प्रत्यारोपित किया गया। अकेले दिल्ली-एनसीआर में 22 ब्रेन डेड लोगों के अंगदान हुए, जिससे 57 लोगों की जान बचाई गई, जबकि सिर्फ गुड़गांव में जनवरी 2015 से अब तक 10 ब्रेन डेड लोगों से 32 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
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पूरे हरियाणा में अंग प्रत्यारोपण के लिए मेदांता और फोर्टिस अस्पताल ही नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) द्वारा अधिकृत है।

जागरूकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मेदांता में बीते चार साल में पांच ब्रेन डेड व्यक्ति से अंग प्रत्यारोपित किए गए थे, लेकिन जनवरी 2015 से अब तक तीन ब्रेन डेड व्यक्ति से अंग प्रत्यारोपित किए जा चुके हैं।

फोर्टिस अस्पताल में अंग प्रत्यारोपण विभाग के प्रमुख डॉ. अवनीश सेठ कहते हैं इस सितंबर 2015 से अब तक छह ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।

पहली बार 5 फरवरी को रात में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर चार लोगों को जीवन दान दिया गया और नेत्रदान कर एक की जिंदगी में रोशनी दी गई।

ह्मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ लीवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अमित रस्तोगी कहते हैं कि धीरे-धीरे ब्रेन डेड लोगों से अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

बीते चार साल के मुकाबले अब लोग ब्रेन डेड के बाद अंगदान के लिए आगे आ रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही जो पहले लाइव डोनर आते थे, उसमें कमी आई है।

ये है ग्रीन कॉरिडोरएनसीआर में सबसे पहले ग्रीन कॉरिडोर की शुरुआत गुड़गांव से हुई थी। फोर्टिस अस्पताल की ओर से 6 अगस्त 2014 को पहली बार गुड़गांव पुलिस और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर पहली बार बतौर ट्रायल इसे बनाया गया था।

इस व्यवस्था में प्रधानमंत्री की यात्रा के तर्ज पर पुलिस एंबुलेंस को ट्रैफिक मुक्त सड़क मुहैया कराती है, जिसके बाद इसी ग्रीन कॉरिडोर के रास्ते ब्रेन डेड व्यक्ति से अंग प्रत्यारोपण के लिए दिल्ली भेजा जा रहा है और दिल्ली से लाया जा रहा है।
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ग्रीन कॉरिडोर की मदद से हाल ही में 32 किलोमीटर की दूरी महज 25 मिनट 40 सेकेंड में तय की गई।

अंग प्रत्यारोपण पर एक नजर •3 जनवरी, 2015: फोर्टिस गुड़गांव से फोर्टिस एस्कॉर्ट दिल्ली ग्रीन कॉरिडोर बनाकर हृदय पहुंचाया गया। अन्य तीन व्यक्ति को अंगदान से जीवन मिला। •4 सितंबर, 215: मेदांता अस्पताल में 45 वर्षीय अगराज का मल्टीपल ऑर्गन का ट्रांसप्लांट किया गया। चार व्यक्ति में हृदय, किडनी और लीवर प्रत्यारोपित हुए। •16 सितंबर, 2015 : फोर्टिस अस्पताल में 59 वर्षीय एक व्यक्ति के ब्रेन डेड के बाद हृदय एक 30 वर्षीय युवा में प्रत्यारोपित किया गया। किडनी और लीवर से तीन मरीजों की जान बचाई गई।
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