दक्षिण जिले के वाहन चोरी निरोधक दस्ते(एएटीएस) ने दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के लिए यहां रहने के लिए फर्जी भारतीय आधार कार्ड व वोटर कार्ड आदि कागजात बनाने वाले जिस गिरोह का पर्दाफाश किया है, उसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त एसके जैन के बयान के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों को शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय बुलाया। पुलिस आयुक्त ने पूरे केस की जानकारी और सीनियर अधिकारियों को गहराई से जांच करने के आदेश दिए।
दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त एसके जैन ने इस गिरोह के बारे में बताया कि दक्षिण जिला पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश कर इस गिरोह के दो बांग्लादेशियों समेत चार आरोपी बिलाल होसेन, उनकी पत्नी और अमीनुर इश्लाम और आशीष मेहरा को गिरफ्तार किया है। एक सवाल के जवाब में संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि जांच के दौरान आम आदमी पार्टी की भूमिका सामने नहीं आई है। इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया। आप ने इस बयान को लेकर एक्स करना शुरू कर दिया था। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने सभी अधिकारियों को शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय बुलाकर केस की जानकारी ली। हालांकि दक्षिण जिला पुलिस आयुक्त अंकित चौहान ने बताया कि पुलिस आयुक्त से समय लेकर केस की बारे में निर्देश व डिस्कशन करने टीम गई थी।
अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारी बन रहे खतरा
दक्षिण जिला पुलिस ने अवैध बांग्लादेशियों के आधार कार्ड व वोटर कार्ड समेत अन्य फर्जी दस्तावेज बनाने वाले जिस गिरोह का पर्दाफाश किया था उसमें अफरोज नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। अफरोज रोहिणी स्थित कर्नाटक बैंक में बनाए गए आधार सेंटर में अनुबंध पर काम करता था। वह बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय कागजात बनाने के 4 हजार रुपये लेता था।
दक्षिण जिला पुलिस ने अब जब दूसरे गिरोह का पर्दाफाश किया है उसमें ये सामने आया है कि फर्रूखाबाद, यूपी निवासी मनमोहन का नाम सामने आया है। मनमोहन फरार है और वह गुरुग्राम में स्थित ओवरसीज बैंक में बनाए गए आधार सेंटर में आधार कार्ड आदि बनाने का काम करता था। जांच में ये बात सामने आई है कि वह एक आधार कार्ड बनाने का सात हजार या उससे ज्यादा रुपये लेता था। पुलिस ने उसे पकडऩे के लिए यूपी के मुरादाबाद में दबिश दी थी।
यूआईडीएआई ने नहीं दी जानकारी
दक्षिण जिला पुलिस ने बताया कि अफरोज ने जो आधार कार्ड बनाए थे उनकी जानकारी यूआईडीएआई से मांगी गई थी। बताया जा रहा है कि उनके एक्ट के तहत वह इस तरह की जानकारी नहीं दे सकते।
सवाल
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अनुबंध पर काम करने वाले लोग फर्जी कागजात बना रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियों को डिटेल नहीं मिलती। ऐसे में इस तरह के गिरोह को रोकना मुश्किल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जानकारी लेने के लिए दिल्ली पुलिस गृहमंत्रालय या फिर कोर्ट जाएगी।
ऐसे उठाते हैं फायदा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच में ये बात सामने आई कि अनुबंध पर काम करने वाले युवकों को पता है कि आधार कार्ड की किसी तरह की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी जाती। उसे में पुलिस आदि उनका कुछ नहीं कर सकते हैं। आरोपी इसका फायदा उठाकर धड़ल्ले से फर्जी आधार कार्ड आदि बना रहे हैं।