दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी बंगलों में अवैध कब्जे को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने 550 से अधिक सरकारी बंगलों में सेवानिवृत्त अधिकारियों के अवैध रूप से रहने के मामले में आवास मंत्रालय को और केंद्र को दो सप्ताह के भीतर खाली कराने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ ने कई वर्षों से सरकारी आवासों पर अवैध कब्जे को ‘साजिश’ के समान बताया। पीठ ने सरकार को अवैध निवासियों पर बकाया लाखों रुपये की वसूली का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगर सरकारी आवास को खाली कराने के खिलाफ किसी अदालत या न्यायाधिकरण द्वारा रोक लगाई जाती है तो ऐसे आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा आवास तुरंत खाली कराए जाएं।
अदालत ने आवास मंत्रालय के सचिव पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। हाईकोर्ट ने 17 जनवरी को केंद्र से पूछा था कि ऐसे कितने सरकारी बंगले हैं, जिन पर पूर्व सांसदों, विधायकों या नौकरशाहों का कब्जा है और ये कब्जा कितने समय से है।
अदालत ने यह आदेश एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें दावा किया गया था कि पूर्व सांसदों, विधायकों और नौकरशाहों ने कई सरकारी आवासों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।