कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
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भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए
अदालत ने गार्ड के बचाव को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि कोई लापरवाही नहीं थी। जब वह बंदूक से कारतूस निकालने की कोशिश कर रहा था, तब दुर्घटनावश गोली चल गई थी। विभिन्न मदों के तहत मुआवजे की राशि 22.4 लाख रुपये से अधिक व उस पर नौ प्रतिशत ब्याज की गणना करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए।
रिमांड के दौरान आरोपी को गिरफ्तारी का आधार देना वैध नहीं: हाईकोर्ट
उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस की ओर से मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए गए रिमांड आवेदन के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का आधार बताना कानून की आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि चूंकि गिरफ्तारी से पहले उसके आधार मौजूद होने चाहिए, इसलिए पुलिस डायरी या अन्य दस्तावेज में गिरफ्तारी के आधार का समसामयिक रिकॉर्ड होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी के लिए गिरफ्तार व्यक्ति को उसका आधार लिखित रूप में न बताने का कोई कारण नहीं हो सकता है। अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में एक आरोपी को राहत प्रदान की।