एक तरफ राज्य सरकार ऑपरेशन मुस्कान चला रही है तो दूसरी ओर मेवात में बच्चे भीख मांग रहे हैं। राज्य सरकार की बाल व युवा कल्याण नीति पर अब मेवात जिले में सवालिया निशान लग रहे हैं।
यहां कम उम्र के भिखारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कस्बा तावडू़ व नूंह बस अड्डा, फिरोजपुर झिरका लघु सचिवालय, लाल कुआं चौक, पिनगवां-पुन्हाना मैन बाजार, नगीना में बड़कली चौक पर भीख मांगने वाले देखते ही नजर आते हैं। मगर इनको रोकने की दिशा में प्रशासन व सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है।
रोडवेज की बसों में सफर करते समय कम बच्चों को भीख मांगते देख सकते हैं। अधिवक्ता मोहम्मद मुजीब खान, पैनल अधिवक्ता अजीज अतर, लुकमान खान, पूर्व बार प्रधान प्रेमवीर सिंह चौहान, मंजूलता सिंह, विपिन जैन, दिनेश नागपाल, लुकमान खान व राजेश छौंकर का मानना है कि भीख मांगना सामाजिक बुराई है।
कम उम्र के बच्चों को ऐसा करने के लिए मजबूर किया जाता है। प्रशासन भी इसकी रोकथाम के लिए जरूरी कदम नहीं उठा रहा है। भीख मांगने पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधान है। लेकिन कड़ाई से लागू नहीं किया जा रहा है।
जिला रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव वाजिद अली का कहना है कि जिला प्रशासन भिक्षावृत्ति बंद कराने के लिए प्रयासरत है। अगर आम लोगों को ऐसा कोई बच्चा मिले तो वह प्रशासन को इसकी जानकारी दें।
मेवात जिले में आपरेशन मुस्कान के दौरान कम उम्र के बच्चों में भीख मांगने की प्रवृत्ति पाई गई। नूंह में सर्वाधिक व दूसरे नंबर पर पुन्हाना कस्बा रहा। ऐसे बच्चों की पहचान कर प्रशासन ने इनकी सूची बनाई है। सरकार उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करेगी। -आबिद हुसैन, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मेवात