राजधानी में सबसे पहले कोरोना संक्रमण हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे दिलशाद गार्डन में बीते 10 दिन से एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। इसे सरकार के ऑपरेशन शील्ड ने बचाया। इसके तहत बड़े पैमाने पर लोगों को होम क्वारंटीन में भेजा गया। दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर इस पर निगरानी रखी गई।
दिलशाद गार्डन की रहने वाली एक महिला और उसके बेटे को सऊदी अरब से लौटने पर कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। दोनों 10 मार्च को लौटे थे। महिला का इलाज करने वाले मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर समेत 7 लोग कोरोना संक्रमित हो गए। इसके बाद सरकार ने दिलशाद गार्डन और पुरानी सीमापुरी एरिया को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया। महिला के संपर्क में आए 81 लोगों की पहचान कर क्वारंटीन किया गया। महिला के बेटे के कांट्रेक्ट सीसीटीवी कैमरे के जरिए निकाले गए।
स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि ऑपरेशन शील्ड के तहत 15 हजारों लोगों का डाटा लेकर मेडिकल टीम ने काम किया। काफी लोगों के कोरोना टेस्ट हुए। इससे हालात फिलहाल नियंत्रित हैं। शाहदरा के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. एसके नायक ने बताया कि जीटीबी अस्पताल में जांच के बाद 15 मार्च को महिला में कोरोना वायरस के लक्षण मिले और 17 मार्च को इसकी पुष्टि हुई। महिला 81 लोगों से मिली थी, जिसमें मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर भी थे।
डॉक्टर, उनके परिवार समेत कांटेक्ट के 7 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले। महिला ने जांच में सहयोग किया, लेकिन बेटा आनाकानी करता रहा। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इससे बेटे के संपर्क में आए लोगों को चिन्हित कर क्वारंटीन किया गया।
123 मेडिकल टीमों ने किया काम
सरकार ने संक्रमण की आशंका को देखते हुए 123 मेडिकल टीमों का गठन किया। दिलशाद गार्डन व पुरानी सीमापुरी इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया। हर टीम से 50-50 घरों की स्क्रीनिंग कराई गई। इस दौरान जिनमें भी कोरोना के लक्षण की आशंका हुई या लक्षण मिले, उन सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाके में अब भी 15 हजार लोगों पर निगरानी रखी जा रही है।