सुरक्षाबलों को 15 दिन के अंतराल पर सैटेलाइट फोन से मिले सिग्नल और खानाबदोशों से मिली खुफिया जानकारी से दहशतगर्दों तक पहुंचने में मदद मिली, जो महादेव पहाड़ी पर छिपे थे। इसी पहाड़ी के नाम पर इस ऑपरेशन महादेव नाम रखा गया था
सुरक्षाबलों ने पहलगाम हमले के गुनहागारों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया है। सुरक्षाबलों को 15 दिन के अंतराल पर सैटेलाइट फोन से मिले सिग्नल और खानाबदोशों से मिली खुफिया जानकारी से दहशतगर्दों तक पहुंचने में मदद मिली, जो महादेव पहाड़ी पर छिपे थे। इसी पहाड़ी के नाम पर इस ऑपरेशन महादेव नाम रखा गया था।
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सूत्रों ने बताया कि जंगल में छिपे आतंकियों ने पहली बार 11 जुलाई को बैसरन इलाके में चीनी सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया। फोन से मिले सिग्नल के बाद सेना और पुलिस आतंकियों के पीछे पड़ गई। सुरक्षा बलों ने जब घेरा सख्त किया तो आतंकी ठिकाना बदलने लगे।
इस दौरान सुरक्षा बल जंगल में रहने वाला खानाबदोशों से भी आतंकियों के बारे में पूछताछ की। इस दौरान शनिवार को भी आतंकियों ने सैटेलाइट फोन इस्तेमाल करने की गलती की। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों और पुलिस को सैटेलाइट फोन के सिग्नल से आतंकियों के महादेव पहाड़ी पर होने का पता चला।
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सिग्नल को दाचीगाम इलाके तक ट्रैक किया गया, जहां से सबसे नजदीकी बस्ती लगभग 30 किलोमीटर दूर चक दारा में है। सुरक्षाबल और पुलिस तुरंत अभियान शुरू किया। स्थानीय खानाबदोशों से क्षेत्र के बारे में मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों पर हमला किया, जो अस्थायी तंबू में आराम कर रहे थे।
करीब तीन घंटे चली मुठभेड़ में तीनों आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया। मंगलवार को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने भी बताया कि मारे गए आतंकियों के पास से बरामद सामान में सैटेलाइन फोन भी था।