कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। अनगिनत लोग इस वैश्विक महामारी से प्रभावित हुए हैं। इस बीच ना जाने कितने लोगों की रोजी रोटी का जरिया बंद हो गया। लॉकडाउन के दौरान लगभग 6 महीने मैदान पर खेल पूरी तरह बंद था। इस कारण खिलाड़ियों को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।
क्रिकेट के मैदान पर अंपायरिंग करने वाले, स्कोरर, ग्राउंड मैन, किराए पर खेल का मैदान मुहैया कराने वाले, बॉल बनाने वाले, खिलाड़ियों के लिए ड्रेस बनाने वाले ऐसे तमाम लोगों के सामने दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने का संकट पैदा हो गया था। अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद खिलाड़ी फिर से मैदान पर लौटने लगे हैं तो मैदान से जुड़े इन लोगों की रोजी रोटी का रास्ता भी फिर से खुलने लगा है।
लॉकडाउन में परिवार चलाने के लिए बेचनी पड़ी कार
मौजूदा समय राजोकरी के एक क्रिकेट मैदान पर अंपायरिंग कर रहे के. के. तिवारी 1985 से खेल के मैदान पर काम कर रहे हैं। खास बातचीत के दौरान के. के. तिवारी ने लॉकडाउन के दौरान के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि 19 मार्च को उन्होंने लीग मैच के लिए अंपायरिंग की थी। जिसके बाद वह लगभग 6 महीना बैठे रहे। लेकिन सरकार की ओर से मैदान पर खेल शुरू करने का आदेश मिलने के बाद सितंबर में उन्हें 16 दिन काम मिला था। लेकिन अक्तूबर में उनके पास अब तक कोई काम नहीं है। जबकि कोरोना महामारी से पहले दिल्ली भर में रोजाना दो सौ से ढाई सौ मैच होते थे। रविवार, शनिवार और छुट्टियों के दिन तो करीब 400 मैच तक होते थे। ऐसे में महीने के 30 दिन उनके हाथ में काम रहता था। कई बार तो उन्हें एक दिन में 3-3 मैच में अंपायरिंग करने का मौका मिल जाता था। जिससे महीने में अच्छी आमदनी हो जाती थी। लेकिन लॉकडाउन के दौरान 24 वर्षीय बेटी की भी नौकरी चली गई। इस दौरान उन्होंने किसी तरह चार महीना घर चलाने की कोशिश की। लेकिन बाद में मजबूरन उन्हें अपनी कार बेचनी पड़ी।
फिर से खुल रहा है रोजी रोटी का रास्ता
लल्लन प्रसाद दिल्ली में छोटे बड़े खेल के मैदानों और स्कूल के मैदानों पर क्रिकेट की पिच और विकेट बनाते हैं। लॉकडाउन से पहले उन्हें इस काम के लिए लगभग 20 हजार रुपये महीने आमदनी हो जाती थी। लेकिन कोरोना महामारी काल में उनके हाथ से काम छिन गया। फिर से खेल शुरू होने के बाद उन्हें दक्षिण दिल्ली के ओम साईं क्रिकेट अकादमी में फिर से पिच बनाने का काम मिला है।
एस. के. तिवारी भी दिल्ली में क्रिकेट के मैदान पर स्कोरर का काम करते हैं। कोरोना महामारी में उनके हाथ से भी काम छिना तो अब तक नहीं मिला है। राजोकरी में किराए पर क्रिकेट का मैदान मुहैया कराने वाले संजय सिंह का लॉकडाउन में आमदनी के सभी रास्ते बंद हो गए। अब फिर से मैदान पर खेल शुरू हुए तो सितंबर में उनके मैदान पर चार मैच हुए थे। जबकि इस महीने अक्तूबर में अब तक केवल दो मैच हुए हैं। उन्होंने बताया कि पहले एक महीने में उनके मैदान पर लगभग 25 मैच होते थे। लेकिन अभी खिलाड़ी मैदान पर खेलने से कतरा रहे हैं। फिर भी रोजी रोटी का रास्ता फिर से खुलता नजर आ रहा है।