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दिल्ली में 100 से ज्यादा सरकारी अस्पताल, ई-संजीवनी से जुड़ा सिर्फ एक

Thu, 01 Oct 2020 04:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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demo pic - फोटो : amar ujala
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कोरोना काल में एक ओर जहां मरीज अस्पतालों में जाने से कतरा रहे हैं वहीं, अस्पतालों में भी संक्रमित और गैर संक्रमित मरीजों के लिए उपचार मुश्किल भरा हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने ई-संजीवनी योजना को लागू किया था, लेकिन दिल्ली में 100 से भी ज्यादा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद इस ऑनलाइन ओपीडी सेवा से केवल एक ही अस्पताल जुड़ा है। दिल्ली तो दूर, केंद्र सरकार के ही अन्य अस्पताल अब तक ई-संजीवनी सेवा से नहीं जुड़ पाए हैं।

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कोविड महामारी के चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ई-संजीवनी सेवा को शुरू किया था। इस सेवा के जरिए अब तक देश में 4 लाख से भी अधिक मरीजों को चिकित्सीय लाभ मिल चुका है। तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में सबसे बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं, लेकिन दिल्ली में फिलहाल केंद्र सरकार का लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ही ई-संजीवनी वेबसाइट पर उपलब्ध है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस सुविधा के जरिए ऑनलाइन चिकित्सा को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, एम्स में लंबे समय से ऑनलाइन चिकित्सा की सुविधा मौजूद है, जबकि दिल्ली सरकार के अस्पतालों को अब तक इसमें शामिल नहीं किया है। केंद्र के सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल भी इस सेवा से नहीं जुड़ पाए हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर लंबे समय से काम कर रहे राजीव दुबे का कहना है कि दिल्ली के अस्पतालों को लेकर एक प्लेटफॉर्म होना चाहिए। वह केंद्र का हो या फिर राज्य का। इससे लोगों को सहूलियत भी रहेगी और उनमें योजना के बारे में जानकारी भी बढ़ेगी, लेकिन अभी हो यह रहा है कि कुछ अस्पताल अपने स्तर पर ई-चिकित्सीय सेवाएं चला रहे हैं तो केंद्र और राज्य अपना अलग-अलग। ऐसे में लोगों को सही जानकारी नहीं मिल पाती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दिल्ली में अब तक 4707 मरीज ऑनलाइन चिकित्सा का लाभ ले चुके हैं। चूंकि, दिल्ली में एक भी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर नहीं है, इसलिए बाकी राज्यों की तुलना में दिल्ली में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को इस सेवा से नहीं जोड़ा गया है। यह सेवा बीते 13 अप्रैल से शुरू की गई थी, लेकिन अब तक इसमें दिल्ली से सिर्फ एक ही अस्पताल जुड़ पाया है।

भीड़ होगी कम, एक अस्पताल पर नहीं होगा भार
आमतौर पर यह देखा जाता है कि दिल्ली के ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के लिए लंबी लाइनें लगती हैं। अगर राजधानी में ऑनलाइन चिकित्सा को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ती है तो न सिर्फ मरीजों की भीड़ पर नियंत्रण हो सकेगा बल्कि एक अस्पताल पर भारभी नहीं हो सकेगा।

ऐसे ले सकते हैं ओपीडी का लाभ
ई-संजीवनी वेबसाइट पर जाकर कोई भी मरीज अपना पंजीयन कर सकता है। फिलहाल इस सेवा से लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज जुड़ा हुआ है। सुबह 9 से दोपहर 1 और दोपहर 2 से शाम 7 बजे तक की ओपीडी सेवा यहां मिल सकती है। होमियोपैथी, ईएनटी, बालरोग, दंत रोग, प्रसूति, आंतरिक मेडिसिन और मनोरोग विभाग को इस सेवा से जोड़ा गया है।

अस्पतालों की स्थिति
. दिल्ली में केंद्र के चार बड़े अस्पताल हैं। यहां रोजाना 20 हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी का लाभ लेते हैं।
. दिल्ली सरकार के 37 बड़े अस्पताल हैं। इनमें प्रतिदिन 50 हजार से अधिक मरीज ओपीडी में जाते हैं।
. दिल्ली में चार बड़े अस्पताल नगर निगम के अधीन हैं, जहां 8 से 10 हजार तक रोगी ओपीडी में पंजीयन कराते हैं।

खर्च भी बचेगा
एम्स के अनुसार, एक मरीज को अस्पताल आने-जाने में करीब 1600 रुपये का खर्चा आता है, जबकि बाहरी राज्य से दिल्ली आकर मरीज का उपचार कराने में करीब 2000 रुपये का भार पड़ता है। ई-संजीवनी सेवा के जरिए ज्यादातर मरीजों का यह खर्च बचाया जा सकता है।

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