नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रेलवे प्रशासन को तीन महीनों के भीतर देश के प्रमुख 36 स्टेशनों की पहचान कर उन्हें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पर्यावरणीय मानक-14001 के आधार पर विकसित करने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि इन रेलवे स्टेशनों को मॉडल के तौर पर विकसित किया जाए और इन्हें ईको स्मार्ट स्टेशन या किसी अन्य नाम से पुकारा जा सकता है। ट्रिब्यूनल ने रेलवे प्रशासन को तीन महीनों में इन स्टेशनों पर पानी और बिजली की खपत कम करने के लिए ऑडिट कराने का भी आदेश दिया है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाल ही में रेलवे प्रशासन की ओर से दाखिल कार्य योजना पर गौर करने के बाद यह आदेश दिया है। रेलवे प्रशासन की ओर से दाखिल रिपोर्ट में देश के करीब 8 हजार स्टेशनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें 520 स्टेशन प्रमुख स्टेशनों की श्रेणी में हैं, जबकि 1484 मध्यम स्टेशनों की श्रेणी में हैं। वहीं, 5966 अन्य स्टेशन हैं। प्रधान पीठ ने कहा कि 520 प्रमुख स्टेशनों में से ईको स्मार्ट स्टेशन के लिए 36 रेलवे स्टेशनों की पहचान दो हफ्तों के भीतर होनी चाहिए। इसके लिए प्रशासन नोडल अधिकारी भी नियुक्त कर सकता है। यह कार्य योजना ट्रिब्यूनल में 15 मार्च से पहले दाखिल की जाए।
प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर करें विचार
पीठ ने कहा कि इन 36 ईको स्मार्ट स्टेशनों पर प्लास्टिक और अन्य कचरों का प्रबंधन करने के लिए रेलवे प्रशासन स्थानीय नगर निकायों को भी साझीदार बना सकता है। इसके अलावा इन स्टेशनों पर प्लास्टिक के पूर्ण प्रतिबंध का भी फैसला ले सकता है। पीठ ने कहा कि रेलवे प्रशासन इन स्टेशनों के पानी और ऊर्जा खपत का ऑडिट तीन महीने में कराए। इस ऑडिट के बाद पानी और बिजली की खपत कम करने के तरीके पर काम किया जाए।
संतोषजनक नहीं है रेलवे स्टेशन पर व्यवस्था
प्रधान पीठ ने महालेखा नियंत्रक (सीएजी) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश के भीतर 17 जोन में 400 प्रमुख और अन्य 8 हजार स्टेशन हैं। 2011 के अंत में सीएजी की ओर से तैयार प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट यह बात स्पष्ट तौर पर बताती है कि सभी स्टेशन पर साफ-सफाई और पर्यावरण प्रबंधन का कामकाज संतोषजनक नहीं है।
रेलवे स्टेशनों पर नहीं है पर्यावरण प्रबंधन
वहीं, पीठ ने सीपीसीबी की अध्ययन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश के प्रमुख 14 स्टेशनों पर इस्तेमाल किए गए पानी की निगरानी को लेकर कोई व्यवस्था नहीं है। न ही स्टेशन पर कोई प्रवाह शोधन संयंत्र है। सीधे जलाशयों में ही दूषित पानी की निकासी होती है। रेलवे स्टेशन के इर्द-गिर्द वनस्पतियों का संरक्षण भी किया जाना चाहिए। पर्यावरण नीतियों को लागू करने के लिए एक निगरानी व्यवस्था का होना जरूरी है।