कहने को कल विश्व स्वास्थ्य दिवस था 12 साल के मासूम राहुल का इंतजार इस दिन भी खत्म नहीं हुआ। बेघर राहुल पिछले 10 महीने से एक ही इंतजार में है कि कब उसकी सर्जरी हो और कब उसे अपनी पीठ की गांठ से होने वाले दर्द से मुक्ति मिले।
अब तो एम्स के बाहर एक-एक घंटे गिनना कि कब उसे अस्पताल में दाखिला मिलेगा इसकी आदत पड़ गई है। पीठ में फोड़े के कारण होने वाले दर्द को जो चीज और बढ़ा देती है वो है सर्जरी के लिए लंबा इंतजार और अस्पताल में बेड न मिलना। वो एम्स के बाहर फुटपाथ पर रोज अपनी सर्जरी की डेट मिलने का इंतजार कर रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार राहुल का दर्द यहीं खत्म नहीं होता उसका परिवार भी उसके इस दुख से बेहद परेशान है। उसके माता-पिता का काम भी छूट गया है। उनका दावा है कि उन्होंने अप्रैल 2015 में राहुल के ऑपरेशन के लिए 15000 रुपए जोड़े थे और उसके चाचा ने जुलाई में होने वाले उसके ऑपरेशन के लिए खून तक का इंतजाम कर लिया था।