अंतरिम बजट में फौजियों को मिली ‘वन रैंक वन पेंशन’ की सौगात से पूर्व सैनिक उत्साहित हैं। दरअसल, गुड़गांव के पूर्व सैनिकों के संघर्ष के कारण ही देशभर के फौजियों को यह सौगात मिली। छह साल पहले यहां के पूर्व सैनिकों ने इसके लिए लड़ाई छेड़ी थी।
वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने जैसे ही वन रैंक-वन पेंशन लागू करने की घोषणा की, पूर्व सैनिक खुशी से उछल पड़े। सभी जिला सैनिक बोर्ड में अंतरिम बजट को लाइव देख रहे थे। पिछले पांच बजट से वह इसी आस में बजट पर टकटकी लगाए रहते थे। आज भी वही नजारा था। आखिरकार छठे बजट ने उनके सपने को साकार कर दिया।
इस संघर्ष के गवाह सूबेदार मेजर संतराम दहिया ने बताया कि 2008 में एक्स सर्विस मैन ऑर्गेनाइजेशन के नाम से एक संगठन बनाकर वन रैंक वन पेंशन की लड़ाई आरंभ की गई। संस्था का पंजीकरण भी गुड़गांव से ही कराया गया। इसके लिए धरने-प्रदर्शन आदि किए गए। इसी साल दिसंबर में कर्नल कुंवर भारद्वाज के नेतृत्व में पांच लोगों ने जंतर-मंतर पर आमरण अनशन किया।
इसमें गुड़गांव के संतराम दहिया, पालम विहार के मेजर ईश्वर सिंह जाखड़ के अलावा गाजियाबाद के सिपाही सुलेमान, अजमेर के नायक लेखराज, झज्जर के सूबेदार ओमप्रकाश शामिल थे। 10 दिन चले अनशन को तुड़वाने विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी और पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण पहुंचे।
आडवाणी के अपने घोषणा पत्र में इसे प्रमुखता से रखने की बात पर अनशन समाप्त किया गया। 2009 में लोकसभा चुनाव था, इसी उम्मीद से अनशन तोड़ दिया गया। उसके बाद से लगातार पूरे देश के पूर्व सैनिक इसके लिए संघर्ष कर रहे थे।
दो लाख सैनिकों को फायदा
इस घोषणा से दक्षिणी हरियाणा के करीब दो लाख पूर्व सैनिकों को इसका फायदा होगा। दक्षिणी हरियाणा में सबसे अधिक पूर्व सैनिक भिवानी में है। वहीं रेवाड़ी और गुड़गांव में करीब 20 पूर्व सैनिक और उनके परिवार इसका लाभ ले पाएंगे।