राजमार्ग मंत्री ने बताया कि कानपुर से लखनऊ तक बनने वाले बनने वाले छह लेन के एक्सप्रेसवे का डीपीआर तैयार हो गया है। एनएचएआई को तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया है, ताकि दिसंबर तक काम दिखने लगे।
यह एक्सप्रेसवे लखनऊ से कानपुर तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के इर्द-गिर्द ही बनेगा, ताकि इस सड़क का दबाव भी कम हो सके। इसे उन्नाव के पास बन रहे 105 किलोमीटर लंबे रिंग रोड से भी जोड़ने की योजना है।
दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा
96 किलोमीटर लंबी दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे परियोजना को कई हिस्सों में बांट कर काम किया जा रहा है। इसके पहले चरण दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन पुल से यूपी गेट तक के हिस्से का काम पूरा हो चुका है। दूसरा चरण यूपी गेट से डासना तक का काम भी तेजी से चल रहा है। गडकरी के मुताबिक, डासना से एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा मेरठ की ओर चला जाएगा, जबकि दूसरा हिस्सा कानपुर चला जाएगा। उन्होंने कहा कि यूपी गेट से डासना तक के हिस्से को भी पहले हिस्से की तरह 14 लेन का बनाया जा रहा है और उम्मीद है कि इसका काम अगले साल मार्च से पहले पूरा हो जाएगा।
सीमेंट या तारकोल से बनेगा तय नहीं
गडकरी ने कहा कि डासना से कानपुर तक बनने वाला एक्सप्रेसवे तारकोल या सीमेंट से बनेगा, यह अभी तय नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि इस समय सीमेंट कंपनियों ने कार्टेल बनाकर सीमेंट महंगा कर दिया है। इसके साथ ही रेत का भी भाव काफी बढ़ गया है। कुछ जगह तो रेत का भाव सीमेंट के बराबर हो गया है। इसलिए वह पहले सीमेंट कंपनियों का रुख देखेंगे। अगर यह सकारात्मक रहा तो ठीक है, वरना तारकोल वाली ही सड़क बनाई जाएगी।