सम-विषम के लागू होने के बाद पहले दिन करीब 10 लाख कारें सड़कों पर नहीं उतरीं। प्रदूषण पर शिकंजा कसने के लिए दिल्ली सरकार की इस पहल के बाद पहले दिन सड़कों पर लाखों की संख्या में वाहनों के नदारद रहे।
इससे अधिकतर सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं रही तो लाखों वाहनों से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आई। 15 नवंबर तक प्रदूषण स्तर में और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। दिल्ली में फिलहाल 35 लाख से अधिक वाहन रजिस्टर्ड हैं।
इनमें से करीब 20.80 लाख ही सड़कों पर निकलते हैं। सम-विषम नंबर वाले वाहनों की संख्या 50-50 फीसदी होने की वजह से करीब 10 लाख वाहन सोमवार को सड़कों पर नहीं निकले। इससे वाहनों की वजह से होने वाले प्रदूषण में भी कमी आई। ब्यूरो
पेरिस की तर्ज पर दिल्ली में तीसरी बार ऑड ईवन लागू
नई दिल्ली। मेक्सिको में 1989 होए नो सर्कुला पॉलिसी के अंतर्गत कोलंबिया की पीक एंड प्लेट स्कीम के तहत दुनियाभर में हवा में मौजूद विषाक्तता और बेहतर यातायात प्रबंधन के लिए ऑड-ईवन की शुरुआत की गई।
पेरिस में 2014 में लागू ऑड-ईवन योजना की तर्ज पर दिल्ली में भी स्कीम लागू की गई है। इसके तहत कारों को उनकी लाइसेंस प्लेट के रंग के आधार पर सप्ताह में एक दिन शाम पांच बजे से 10 बजे तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। कोलंबिया की राजधानी बगोटा में भी पिक एंड प्लेट स्कीम को लागू किया गया। इसके तहत कार लाइसेंस प्लेटों में प्रतिबंधित अंक दिनों के साथ जुड़े थे।
चीन में बीजिंग ने 2008 के ओलंपिक के दौरान वैकल्पिक ड्राइविंग-डे प्रतिबंधों को दो महीने के लिए लागू किया था। इसके तहत विशिष्ट अंकों के आधार पर वाहनों को प्रतिबंधित करने के लिए दिन तय किए गए थे। 2015 में इटली के सबसे बड़े शहरों में से रोम और मिलान को प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हुई थी।
मिलान में निजी कारों और दोपहिया वाहनों पर लगातार तीन दिनों तक रोजाना छह घंटे, जबकि रोम में सोमवार को नौ घंटे के लिए विषम संख्या वाली प्लेटों पर प्रतिबंध लगा गया था। मंगलवार को भी नंबर प्लेटों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पेरिस में सम-विषम की शुरुआत करते हुए विषम संख्या में कारों को कुछ दिनों के लिए अनुमति दी गई थी। दिल्ली सरकार की ऑड-ईवन रोड रोडिंग योजना सोमवार को तीसरी बार लागू की गई।