पिछले कुछ वर्षों में देश में जहां दिल की बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। वहीं देश में हर वर्ष होने वाली मौतों में 60 फीसदी के पीछे वजह यही बीमारियां हैं। इनमें मुख्य रुप से है हार्ट अटैक। अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है तो उसे सीपीआर के जरिए बचाया जा सकता है, लेकिन ये सुविधा हर जगह न होने के कारण ऐसा नहीं होता। इसीलिए अब मंगलवार को देश में पहली बार एक लाख लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण देने की तैयारी की गई है। 23 अक्तूबर को दिल्ली सहित विभिन्न शहरों के लोगों को ये प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के डॉक्टर भी शामिल हैं।
एम्स के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. राकेश गर्ग का कहना है कि भारत में हार्ट अटैक की मृत्युदर 23 फीसदी है। जबकि चीन जैसे देश में ये आंकड़ा 93 फीसदी है। इसके पीछे वजह है चीन में सीपीआर को लेकर जागरुकता। उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक आने के बाद मरीज के पास महज चंद ही समय होता है, इसे सीपीआर देने से उसके हार्ट को दोबारा पंप किया जा सकता है। सभी सार्वजनिक स्थानों, स्कूल और अस्पतालों में ये सुविधा होना चाहिए।
इसी को देखते हुए इंडियन रिससिटेशन काउंसिल एक लाख लोगों को सीपीआर का मुफ्त प्रशिक्षण देगी। इसके लिए दिल्ली समेत देशभर के शहरों में टीमें नियुक्त की गईं हैं। डॉ. गर्ग का कहना है कि उन्होंने बताया कि सीपीआर (कार्डियो प्लमनेरी रिससिटेशन) के जरिए मरीज को पीठ के बल लिटाकर मुंह के बल से कृत्रिम सांस दें। उसके रक्त संचार की जांच करें। रक्त संचार सही हो रहा है तो मुंह से सांस देने की प्रक्रिया जारी रखें। रक्त संचार बंद है तो सीपीआर शुरू करें। सीपीआर के जरिए मरीज की छाती को तेजी के साथ कम से कम 30 बार दबायी जाती है। ताकि मरीज का रक्त संचार हो और हार्ट पहले की भांति कार्य कर सके।
उन्होंने बताया कि लोगों को सीपीआर के बारे में जानकारी देने के लिए सिलिकॉन 3डी मॉडल का इस्तेमाल भी किया जाएगा। पांच चरणों में सीपीआर देने के तरीके के बारे में समझाया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि वे छाती को दबाएं। इसके बाद, सिलिकॉन के मॉड्यूल के साथ डॉक्टर प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने ये भी बताया कि प्रशिक्षण देकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी कर रही है। अभी तक दुनिया में सबसे ज्यादा सिंगापुर में 28 हजार लोगों को एकसाथ सीपीआर का प्रशिक्षण देकर ये रिकॉर्ड बनाया था।