देश में हीमोफीलिया की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। माकूल इलाज नहीं मिलने के कारण मरीज लगातार दम तोड़ रहे हैं। बावजूद, इस गंभीर रोग से पीड़ित महज 22 हजार रोगियों की ही पहचान हो सकी है।
हीमोफीलिया फेडरेशन इंडिया ने सरकार के सामने आठ सूत्रीय अपील जारी करते हुए हीमोफीलिया के मरीजों की परेशानी दूर करने के लिए उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है, ताकि मरीजों को नई जिंदगी मिल सके।
डॉक्टरों के मुताबिक, हीमोफीलिया के मरीजों को जोड़ों की दिव्यांगता के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ती है। राजधानी में हीमोफीलिया केयर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस बीमारी से संबंधित सभी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने राय रखी।
विंग कमांडर (रिटायर्ड) एसएस रॉय चौधरी ने एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में प्रत्येक 10 हजार लोगों में से एक व्यक्ति हीमोफीलिया से ग्रस्त है। देश में अब तक एक लाख 33 हजार से अधिक हीमोफीलिया के मरीज हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि महज कुछ हजार मरीजों की ही पहचान हो सकी है, जिनकी पहचान हुई भी है उन्हें हीमोफीलिया के लिए तय अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक इलाज और दवाइयां नहीं मिल रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हीमोफीलिया के मरीजों को मौजूदा व्यवस्था की वजह से ताउम्र परेशानियां झेलनी पड़ रही है। इससे पीड़ित मरीज आजीवन इसका शिकार रहते हैं। इसे एंटी हीमोफीलिया फैक्टर्स या एएचएफ से संबंधित दवाइयों से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। विदेशों में विकसित किए जाने की वजह से दवाइयां महंगी हैं।
नतीजतन, दवाएं आमतौर पर सभी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं रहती। अब तक हीमोफीलिया फेडरेशन (इंडिया) ने हीमोफीलिया से ग्रस्त 22 हजार से अधिक बच्चों की पहचान की है।