16 लाख की आबादी में करीब डेढ़ लाख लोग खून की कमी के शिकार
खराब खानपान बना बड़ी वजह गंभीर एनीमिया के मामलों में सुधार का दावा
शेरसिंह डागर
नूंह। जिले में कुपोषण और असंतुलित खानपान का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब 16 लाख की आबादी वाले नूंह जिले में लगभग डेढ़ लाख बच्चे, किशोर, महिलाएं और युवा एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और छोटे बच्चों की है, जिनमें आयरन की कमी सबसे अधिक मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लोगों की खानपान संबंधी आदतें इस समस्या की सबसे बड़ी वजह हैं। अधिकांश लोग दूध, घी और मांस को ही पौष्टिक भोजन मानते हैं, जबकि आयरन की पूर्ति के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, भुना चना, गुड़, बाजरा और आयरन युक्त अन्य खाद्य पदार्थ अधिक जरूरी हैं। आयरन की कमी लगातार बढ़ने से बच्चों की शारीरिक और मानसिक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रहा अभियान : जिले को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाया हुआ है। विभाग की टीमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और गांवों में जाकर बच्चों, किशोरियों और महिलाओं की नियमित जांच कर रही हैं। जिनमें खून की कमी पाई जाती है, उन्हें आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां, जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन तथा चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है। विभाग का दावा है कि लगातार निगरानी और उपचार के कारण गंभीर एनीमिया के मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में कुछ सुधार हुआ है।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर : विशेषज्ञों के अनुसार एनीमिया से पीड़ित बच्चों में थकान, कमजोरी, चक्कर आना, सुस्ती और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। ऐसे बच्चे अक्सर पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते और कक्षा में उदास या खोए-खोए रहते हैं। कई अभिभावक इसे बच्चे की मानसिक कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि वास्तविक कारण शरीर में खून की कमी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे बच्चों की समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है।
तीन श्रेणियों में होता है एनीमिया: स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एनीमिया को हल्का, मध्यम और गंभीर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। गंभीर एनीमिया विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक होता है और समय पर इलाज न मिलने पर मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा हो सकता है। विभाग का कहना है कि पिछले एक वर्ष में गंभीर एनीमिया के मामलों में कमी लाने में सफलता मिली है।
जिले में सबसे अधिक एनीमिया गर्भवती महिलाओं और किशोर आयु वर्ग में पाया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह संतुलित और आयरन युक्त भोजन का अभाव है। लोगों को खानपान में सुधार करना होगा। स्वास्थ्य विभाग नियमित जांच, आयरन की दवाइयों और जागरूकता अभियान के माध्यम से एनीमिया को कम करने का लगातार प्रयास कर रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में गंभीर एनीमिया के मामलों में सुधार हुआ है।
— डॉ ज्योत्सना, सिविल सर्जन, नूंह।
फोटो: जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में उपचार के लिए गई महिलाएं।