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आबादी एक लाख, गांव 40, डॉक्टर एक

Sat, 09 Apr 2016 10:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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आबादी करीब एक लाख, गांव 40, डॉक्टर एक वो भी डेंटल, यह हाल है राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तिगांव का। जो इनेलो से लगातार दूसरी बार विधायक बने नसीम अहमद के पैतृक गांव है। यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिना डॉक्टरों के डिलेवरी हट बन कर रह गया है।
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सरकार मेवात में स्वास्थ्य सेवाएं देने का ढिंढोरा तो पीटती है लेकिन मेवात की हकीकत यही बयान करती है। प्रदेश की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शांति राठी ने 24 जुलाई 1994 को तत्कालीन वक्फ एवं मत्स्य मंत्री शकरूल्लाह की अध्यक्षता में उनके पैतृक गांव तिगांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) की आधार शिला रखी थी।

करीब दो-तीन साल में बनकर तैयार हुए इस अस्पताल में वर्ष 2004 तक तो लोगों को कुछ स्वास्थ्य सुविधायें मिलती रहीं लेकिन 2005 के बाद से तो सरकार ने इस अस्पातल से डॉक्टर ही हटा लिए।
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जिसकी वजह से 2014 तक यह अस्पताल एक खंडहर और जुआ खेलने वालों का अड्डा बनकर रह गया। सरकार के नियमों के अनुसार 30 हजार की आबादी पर एक पीएचसी होनी चाहिए लेकिन यह तीन पीएचसी के बराबर है। इसके बाबजूद यहां सुविधा नहीं है।

 नियम के अनुसार एक पीएचसी में दो मेडिकल ऑफिसर, एक डेंटल सर्जन, 3 स्टाफ नर्स, एक हेल्थ इंस्पेक्टर, एक लेडी हेल्थ विजिटर (एलएचवी), एक लेब टेक्निश्यिन, एक फार्मासिस्ट,  कलास फोर और स्वीपर होना जरूरी है लेकिन यहां पर केवल एक डेंटल सर्जन और दो स्टाफ नर्स हैं। अस्पातल में कार्यत डॉक्टर रजनीकांत का कहना है कि फिलहाल यह अस्पताल एक डिलेवरी हट के तौर पर काम कर रहा है।

 जिन तत्कालीन वक्फ एवं मत्स्य मंत्री शकरूल्लाह की अध्यक्षता में इस अस्पताल की आधारशिला रखी गई थी आज उनके पुत्र नसीम अहमद वर्ष 2010 से लगातर इनेलो पार्टी के विधायक हैं और तिगांव उनका पैतृक गांव है।

 गांव बुचाका तिगांव के सरपंच हनीफ का कहना है कि उन्हाेंने अस्पताल की समस्याओं के बारे में विधायक और प्रशासन से कई बार गुहार लगाई है पर उनकी कोई नहीं सुनता। अस्पातल में आए मरीज मुबारिक, सहजी और अब्दुल हनीफ का कहना है कि यहां कोई सुविधा नहीं है। विधायक नसीम अहमद का कहना है कि सरकार मेवात में डॉक्टर भेजना ही नहीं चाहती है। मेवात में रिक्त पडे़ पदों को भरने के लिये उन्होंने सीएम और स्वास्थ्य मंत्री से कई बार शिकायत कर चुके हैं।

 मेवात के सिविल सर्जन बीके राजौरा का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के बारे में उन्हाेंने जानकारी सरकार और अधिकारियों को दे रखी है। फिलहाल जितने उनके पास डॉक्टर हैं उनसे काम चल रहा है।
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