पिछले कई वर्षों से लगातार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सिभांवली शुगर मिल और डिस्टिलरी पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
साथ ही जिस कैनाल में गंदगी फैला रहे थे, उसकी सफाई कराने के निर्देश दिए हैं। मालूम हो कि गंगा में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ कृष्णकांत ने एनजीटी में याचिका दाखिल की है।
याचिका के तहत दाखिल सिंभावली मामले पर 30 मई को सुनवाई हुई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ के फैसले को जस्टिस एमएस नांबियार ने सोमवार को सुनाया।
इसका खर्च भी वहन करेंगी
दोनों औद्योगिक इकाइयों पर करीब एक करोड़ का जुर्माना लगाया है। साथ ही आदेश दिया है कि जिस कैनाल में इकाइयां प्रदूषण फैला रही थीं, उसकी साफ सफाई कराई जाए।
जिसका खर्च दोनों इकाइयां वहन करेंगी। इसके साथ ही डिस्टिलरी को तत्काल प्रभाव से बंद कराने का प्रदूषण बोर्ड को आदेश दिया है।
कोर्ट का कहना है कि डिस्टिलरी भारी जल प्रदूषण कर रही है। साथ ही इकाई के उपकरण पर्यावरण नियमों पर खरे नहीं उतरे हैं।
...तब तक रोक बरकरार रहेगी
बैंच ने कहा कि इकाई लंबे समय से प्रदूषण फैला रही है। जब तक इसमें सुधार नहीं किया जाता है, तब तक रोक बरकरार रखी जाए।
वकील राहुल चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बार-बार इकाई को आगाह करने बावजूद इन्होंने सुधार नहीं किया।
इसके बाद कोर्ट ने आदेश सुनाया है। गौरतलब है कि गंगा में प्रदूषण फैलाने के मामले में जिले की करीब 16 प्रमुख इकाई शामिल हैं। इन मामलों पर सुनवाई 4 जुलाई को होनी है।