गेट तक छात्रों को सुरक्षाकर्मी घसीटकर लाए
अस्थायी तंबू को हटाना शुरू कर दिया और छात्रों को घसीटकर गेट नंबर-7 तक बाहर लाया गया। फिर पुलिस के साथ एबुलेंस में अस्पताल भेज दिया गया। छात्रों को कैंपस से बाहर लाने के दौरान उनके साथ बर्बरता की गई। बाल खींचे गए और उनके पेट पर मारा गया। जिससे कुछ छात्रों को मामूली चोट भी आई है। छात्रों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के साथ भी मारपीट की। बता दें कि हंगामे को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल है। इसमें छात्र आप बीती को बयां करते हुए नजर आ रहे है।
छात्रों के सभी आरोप बेबुनियाद और गलत
इस पूरे घटनाक्रम पर जामिया के एक अधिकारी ने बताया कि छात्रों की तरफ से लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के स्थल पर कुछ छात्रों के बीच में झगड़ा हुआ था। इस दौरान दो छात्रों की तबियत अधिक खराब होने की सूचना प्रशासन को मिली थी। छात्रों के स्वास्थ्य की चिंता को देखते हुए उन्हें नजदीकी अस्पताल भेजा गया। प्रशासन के लिए छात्रों का स्वास्थ्य प्राथमिकता था। छात्रों को अस्पताल भेजने के दौरान दूसरे छात्रों द्वारा विरोध दर्ज कराया जा रहा था। इस दौरान छात्रों ने सुरक्षाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया। उनके साथ गाली-गलौज की और उनके कपड़े फाड़ दिए। फिर सुरक्षाकर्मियों ने आत्म सुरक्षा के लिए खुद का बचाव किया।
जामिया में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए है सब्जेक्ट एसोसिएशन
अधिकारी ने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से उनकी मांगों का लिखित में ब्यौरा मांगा था। लेकिन छात्रों की तरफ से वह उपलब्ध नहीं कराया गया। जामिया में वर्ष 2005-06 के बाद से छात्र संघ चुनाव पर रोक लगी हुई है। छात्र संघ के चलते कैंपस में काफी तनाव रहता था। कई बार मारपीट की घटना भी सामने आई थी। छात्र संघ चुनाव के संबंध में कोर्ट के भी निर्देश है। जिसके चलते चुनाव नहीं होता है। वर्ष 2022 में छात्र संघ चुनाव के आयोजन को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल हुई थी। लेकिन कोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया था। जामिया प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव पर रोक के बावजूद उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखा है। इसके लिए जामिया के सभी 48 विभागों और 28 केंद्रों में सब्जेक्ट एसोसिएशन बना रखी है। इसका चुनाव बैलेट के माध्यम से होता है। एसोसिएशन में छात्रों के प्रतिनिधित्व के लिए तीन पद निर्धारित है।
छात्र किए निष्कासित और कैंपस में आने पर लगाया बैन
वहीं इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए दो छात्रों को निष्कासित और कैंपस बैन करने का आदेश जारी किया है। इसमें मोहम्मद जासिम को छह महीने के लिए तत्काल प्रभाव से कैंपस बैन किया है। जासिम पर 12 अक्तूबर को अनाधिकृत तौर पर कैंपस में घुसने, सुरक्षाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने, गाली-गलौज करने, अनुशासन तोड़ने, अनुपस्थित रहने सहित कई दूसरी वजहों को लेकर कार्रवाई की गई है। जबकि बीए एलएलबी(ऑनर्स) के छात्र एबिन को एक साल के लिए कैंपस से बैन और निष्कासित किया गया है। एबिन पर भी प्रशासन ने कार्रवाई के संबंध में कई आरोप लगाए है।
जामिया के गेट नंबर सात से जबरन अंदर घुसे छात्र
शनिवार दोपहर को जामिया के गेट नंबर पर सात पर छात्रों ने दोबारा से प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। शाम को जबरन गेट के अंदर छात्र घुस गए। इस बीच प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्र एबिन ने भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया। पुलिस ने कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया। जामिया के छात्रों द्वारा अलग-अलग तरीक से घटनाक्रम को लेकर रोष व्यक्त किया जा रहा है। गेट पर जामिया कुलपति और रजिस्ट्रार के पोस्टर चस्पा कर दिए । शाम को छात्रों ने वीसी गेट तक मार्च भी निकाला और घटना की निंदा की। वहीं छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट की अलग-अलग छात्रों संगठनों आइसा और एनएसयूआई ने आलोचना की है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ ने भी घटना की निंदा की। छात्र संगठन आइसा ने मुख्य प्रॉक्टर का इस्तीफे की मांग की और छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए उनको जिम्मेदार ठहराया। साथ ही छात्रों के खिलाफ जारी हुए निलंबन और निष्कासन के आदेश को बिना शर्त के वापस लेने और जामिया छात्र संघ चुनाव को बहाल करने व तारीख की घोषणा की मांग की गई। पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की गई।