एक ओर जहां दशहरा पर देश भर में रावण के पुतले का दहन किया गया। वहीं, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख धाम के गांव में लोगों के घरों में चूल्हा तक नहीं जला। रावण की खंडित मूर्ति पर पुष्प अर्पित किए गए।
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ravan temple
- फोटो : लाल सिंह
साथ ही, लोगों ने रावण की खंडित मूर्ति को मंदिर में रखकर आरती महायज्ञ के अलावा रुद्राभिषेक भी किया गया। सुबह 7 बजे से देर शाम तक कार्यक्रम हुए जिसके बाद ग्रामीणों ने विशाल भंडारा किया। इसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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बिसरख धाम में रावण मंदिर के महंत अशोकानंद ने बताया कि बिसरख को रावण की जन्मस्थली माना जाता है। यहां रावण के पिता मुनि विश्रवा ने आठ फीट के शिव लिंग की स्थापना की थी।
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ग्रामीणों का मानना है रावण में अहंकार था, लेकिन परम ज्ञानी था। यहां उसके अहंकार की नहीं, बल्कि ज्ञान की पूजा की जाती है। पुराणों में भी रावण की राख को माथे पर लगाने का प्रचलन है।
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लिहाजा, यहां रावण की पूजा अर्चना के साथ उससे ज्ञान अर्जन के लिए अभिषेक किया गया। वहीं, समिति द्वारा सहमति ली गई कि इस बार रावण की मूर्ति जरूर स्थापित की जाएगी।
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खंडित मूर्ति ही बनी आस्था का प्रतीक
10 अगस्त को रावण की प्रतिमा को अराजक तत्वों ने खंडित कर दिया था। इसके बाद भी ग्रामीणों के मन में रावण के प्रति आस्था का दीप नहीं बुझा।
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ग्रामीणों ने खंडित मूर्ति को ही आस्था का प्रतीक मानते हुए पूजा की। महंत ने बताया कि अगर मूर्ति स्थापित हो जाती, इसके बाद तोड़ दी जाती तो वह खंडित मानी जाती।
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टूटी हुई मूर्ति को सही तरीके से जोड़कर स्थापित न करके पूजा योग्य बना दिया गया।
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हजारों की संख्या में शामिल हुए लोग बिसरख में सुबह सात बजे से ही हरियाणा, दिल्ली, यूपी सहित अन्य जगहों से जुटे लोगों ने मंत्रोच्चारण के साथ रावण की पूजा की और भंडारा ग्रहण किया।
इस दौरान ग्राम प्रधान अजय भाटी, ब्लाक प्रमुख अमरीश भाटी, कांग्रेस के दीपक भाटी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीतांबर शर्मा, ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष धनेश शर्मा व अन्य कई लोग मौजूद रहे।