गौतमबुद्ध नगर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बृहस्पतिवार को महिला की हत्या करने के मामले में पति को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। महिला की हत्या वर्ष 2011 में हुई थी। सजा का आधार महिला के मरने से पहले मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान को बनाया गया वहीं, सबूतों के अभाव में ससुर को बरी कर दिया गया।
जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज तेवतिया ने बताया कि गाजियाबाद निवासी ब्रह्मदेव ने दादरी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था कि 14 जुलाई 2010 को उन्होंने बेटी प्रियंका और नेहा की शादी दादरी के न्यादरगंज निवासी कृष्णपाल के बेटे सोनू और उसके छोटे भाई के साथ की थी।
शादी के दो महीने बाद से ही सोनू और कृष्णपाल ने प्रियंका से दहेज की मांग करनी शुरू कर दी थी। इससे इंकार करने पर सोनू प्रियंका के साथ मारपीट करता था। सात नवंबर 2011 को संदिग्ध हालात में प्रियंका जल गई थी।
गंभीर हालत में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में ही प्रियंका ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर आग लगाने का आरोप पति पर लगाया था। 14 नवंबर 2011 को उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में कई गवाह मुकर गए थे और सबूतों का अभाव हो गया। मगर अदालत ने प्रियंका के बयान को आधार बनाया, जो उसने मरने से पहले दिए थे।