जिस उम्र में लोग घरों में बैठकर परिवार के साथ आराम फरमाते हैं, उस उम्र में अब्दुल शकूर अपने 8 लोगों के परिवार का पेट पालने के लिए मेहनत करता था। बांस गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, अब्दुल शकूर का परिवार 20 साल से यहां पर रह रहा है। अब्दुल इतने मिलनसार थे कि वह अपनी परेशानियों की जगह दूसरों की परेशानियों को दूर करने में लगे रहते थे।
मूलरूप से बिहार निवासी मृतक 20 साल पहले गुरुग्राम आए थे। यहां वह बांस कुसला गांव में रहते हुए आईएमटी मानेसर बांस कुसला चौक पर पान-सिगरेट का खोखा लगा अपनी आजीविका चला रहे थे। मृतक के सबसे बड़े दामाद मोहम्मद इरशाद ने बताया कि घर में उनके ससुर की अम्मी, अब्बू के अलावा, उनकी पत्नी रहती है।
तीन लड़कियों का निकाह कर दिया जबकि एक लड़की कुंवारी है। वहीं तीन बेटे छोटे हैं और स्कूल जाते हैं। सभी की जिम्मेदारी अब्दुल शकुर पर ही थी। बुजुर्ग की पत्नी ने कहा कि उनके पति कभी किसी से अभद्रता भी नहीं करते थे, लेकिन आरोपी ने ऐसा करके पूरे परिवार को बर्बाद कर दिया। मृतक के परिजनों का कहना है कि हमें जाति या संप्रदाय से कोई लेना-देना नहीं। हम चाहते है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिले।