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सावधान : कहीं आपका बच्चा तो इन मौत की बसों में सफर नही कर रहा...

Thu, 09 Mar 2017 08:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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बसों की जांच करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद के कई नामीगिरामी स्कूल मानकों को दरकिनार कर स्कूल बसें चला रहे हैं जिसमें न तो अचानक आग लग जाने से निपटने के लिए अश्निशमन यंत्र है और न ही फर्स्ट एड बॉक्स। कई खामियों को समेटे हुए ये बसें मौत की बसों से कम नहीं हैं। 
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परिवहन शुल्क के नाम पर निजी स्कूल अभिभावकों की जेब पर लगातार बोझ बढ़ा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी नौनिहालों की जिंदगी खतरे में पड़ी हुई है। स्कूली वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा निर्देशों के बावजूद तय मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

बृहस्पतिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने स्कूली वाहनों का औचक निरीक्षण किया तो चिंताजनक तस्वीर उभरकर सामने आई। आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल के नेतृत्व में दो घंटे चले चेकिंग अभियान में 49 बसों के चालान काटे गए और 9 बसों को जब्त किया गया। 
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दो घंटे चला अभियान, सभी बसें फेल

बसों की जांच करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
आयोग के सदस्य बालकिशन ने बताया कि 22 बिंदुओं पर आधारित चेकिंग अभियान चलाया गया। बीपीटीपी पुल और बाईपास रोड पर करीब दो घंटे चेकिंग का अभियान चलाया। कई नामी स्कूलों और कॉलेजों की बसों की धरपकड़ की गई लेकिन कोई भी बस मानक पर खरी नहीं उतरी।

जांच के दौरान बसों में न कैमरे मिले न ही फर्स्ट एड बॉक्स मिले। चालक बिना वर्दी में थे। कई बसों में महिला अटेंडेंट की जगह हेल्पर से काम चलाया जा रहा था। बसों में आग से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र भी नहीं मिले। 
 
चालान काटने के बाद आयोग की टीम ने निजी स्कूलों में जाकर स्कूली बसों की जांच की। जांच टीम शहर के नामी स्कूलों में पहुंची, इन स्कूलों की बसों में भी नियम ताक पर पाए गए। आयोग के सदस्य बालकिशन गोयल ने बताया कि एमवीएन स्कूल की बसों में काफी खामियां मिलीं। इसके बाद आयोग की टीम डीपीएस स्कूल सेक्टर-19 पहुंची, यहां स्कूली बसों के जीपीएस सुचारू नहीं पाए गए।
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जिंदगी की कीमत महज 100 रुपये

बसों की जांच करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
कहने को नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर तमाम नियम बनाए गए हैं, लेकिन इन नियमों का पालन आखिरकार क्यों नहीं हो पाता। इसकी वजह नियमों का लचीला होना भी हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक जिन 22 बिंदुओं को ध्यान में रखकर चेकिंग अभियान चलाया गया, उनका पालन न करने पर महज 100 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे में स्कूल संचालक और निजी बस ऑपरेटर तय मानक पूरा करने की जगह उल्लंघन करते हैं।
 
क्या क्या मिली खामियां
. किसी स्कूल बस के आगे व पीछे नहीं लिखा था ‘ऑन स्कूल ड्यूटी’। 
. निजी ऑपरेटर की बसों पर नहीं था स्कूल का नाम व टेलीफोन नंबर।
. स्कूली बसों में ड्यूटी के समय चालक व सहायक नहीं दिखे वर्दी में। 
. कई स्कूली बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को ढोया जा रहा था। 
. अधिकांश स्कूल बसों की खिड़कियों पर नहीं लगी थी हॉरिजेंटल ग्रिल।
. कई स्कूल बसों में न आरामदायक सीटें थीं और न ही इमरजेंसी गेट।

हाईकोर्ट के आदेश पर स्कूली वाहनों की जांच के लिए हम पहुंचे थे। जांच के दौरान मानकों को अनदेखा कर बसें दौड़ती मिलीं। इसकी रिपोर्ट तैयार कर हाईकार्ट में दी जाएगी। 15 मार्च तक सभी जिलों में औचक निरीक्षण का अभियान चलाया जाएगा।
-बालकृष्ण गोयल, सदस्य-बाल अधिकार संरक्षण आयोग
 
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