ओखला लैंडफिल साइट पर धीमी गति से जैविक कचरे के खनन के चलते इसे पूरी तरह साफ करने की तारीख दो साल आगे बढ़ा दी गई है। पहले इसे 2024 के आखिर तक साफ होना था, लेकिन अब इसे 2026 के आखिर तक साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। 2019 में लैंडफिल साइट पर जैविक कचरे की खुदाई का काम शुरू हुआ और अब तक करीब 30 लाख मीट्रिक टन कचरे का खनन किया गया। करीब 40 लाख मीट्रिक टन जैविक कचरा अभी यहां बचा है, जबकि कचरे की मात्रा हर दिन बढ़ती जा रही है।
भलस्वा, गाजीपुर और ओखला लैंडफिल साइटों पर जमा कचरे के जैव उपचार और जैव खनन करने का काम 2019 में एक साथ शुरू किया गया। इस काम पर दस एजेंसियों को किराए पर लगाया गया। दो साल बाद इस काम में करीब 30 एजेंसियों को लगाया गया। इनमें से तीन एजेंसियों को 26 ट्रोमेल और दो क्लीमेन मशीनों के साथ ओखला लैंडफिल साइट पर लगाया गया।
निगम के मुताबिक जगह के अभाव में जैविक कचरे को उपचार के बाद इससे निकले आरडीएफ और सीएंडडी वेस्ट को ओखला लैंडफिल साइट पर ही जमा किया जाता रहा, जिसका नतीजा ये हुआ कि लैंडफिल साइट पर कचरे का ढेर घटने के बजाय बढ़ता गया। 2021 में इसकी ऊंचाई करीब 55 मीटर से भी ऊपर पहुंच गई। यही हाल गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइटों पर भी हुआ। इन दोनों कचरा डंप साइटों की ऊंचाई भी रिकार्ड तोड़ नजर आई।
उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और एनजीटी तीनों कर रहे निगरानी
उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तीनों ही मौजूदा समय में लैंडफिल साइटों पर जैविक कचरे के खनन की निगरानी कर रहे हैं। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के राज्य स्वच्छ भारत मिशन निदेशक को ठोस कचरा प्रबंधन के अंतर्गत 1152.60 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की हैं।
बताना जरूरी है कि 2019 में जब तीनों लैंडफिल साइटों पर जैविक कचरे के खनन का काम शुरू हुआ, तो एनजीटी ने इस काम के लिए तब पूर्वी दिल्ली नगर निगम को 125 करोड़ रुपये, उत्तरी दिल्ली नगर निगम को 75 करोड़ रुपये और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को 50 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। तीनों लैंडफिल साइटों पर तय लक्ष्य के मुताबिक जैविक कचरे का निपटान नहीं हो पाया है।